
महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष से समानांतर सरकार तक, शिबू सोरेन की ऐतिहासिक कहानी
झारखंड में अलग राज्य की लड़ाई लड़ने वाले शिबू सोरेन की पार्टी भले ही अभी राज्य में सरकार चला रही है, लेकिन कभी शिबू सोरेन टुंडी के जंगलों में अपनी समानांतर सरकार चलाते थे। शिबू सोरेन से जन्मदिन पर उनके जीवन से जुड़ा ये दिलचस्प जानकारी।
झारखंड में अलग राज्य की लड़ाई लड़ने वाले शिबू सोरेन की पार्टी भले ही अभी राज्य में सरकार चला रही है, लेकिन कभी शिबू सोरेन टुंडी के जंगलों में अपनी समानांतर सरकार चलाते थे। उन्होंने मंत्रिमंडल का गठन भी किया और मंत्रियों के बीच अलग-अलग विभागों का बंटवारा कर उनके बीच काम भी बांटे।
टुंडी में महाजनी प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले शिबू सोरेन ने गिरिडीह एवं धनबाद जिले में भूमिगत आंदोलन चलाकर 1972 में समानांतर सरकार बनाई थी। उन्होंने संयुक्त बिहार की कांग्रेस सरकार के समानांतर अपनी सरकार बनाई थी। इस सरकार में मुख्यमंत्री खुद शिबू थे, जबकि उनके मंत्रिमंडल में गृह, शिक्षा, कृषि आदि विभागों के मंत्री भी थे। मंत्रियों को विभाग के हिसाब से काम का भी बंटवारा शिबू सोरेन ने करके रखा था। नियमित रूप से शिबू सोरेन अपने मंत्रिमंडल की बैठक करते थे।
सभापति का निर्णय होता था सर्वमान्य
शिबू सोरेन ने अपने मंत्रिमंडल में टुंडी के कोशवा टुडू को विधानसभा का अध्यक्ष बनाया था। बैठक में अंतिम निर्णय सभापति ही लेते थे। क्षेत्र में शिबू सोरेन की इतनी पकड़ी थी कि टुंडी और आसपास के आदिवासी गांव के लोग अपनी समस्या लेकर शिबू सोरेन के मंत्रियों के पास ही पहुंचते थे।
टुंडी के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र पोखरिया आश्रम में शिबू सोरेन मंत्रिमंडल की बैठक करते थे। बाद में चलकर पोखरिया आश्रम ही शिबू आश्रम के रूप में प्रसिद्ध हुआ। शिबू की समानांतर सरकार में गृह व उत्पाद मंत्री गांडेय के बसंत पाठक, कृषि मंत्री जामताड़ा के झगरू पंडित व शिक्षा मंत्री टुंडी के राजेंद्र तिवारी थे। शिबू सोरेन ने अपने मंत्रिमंडल में योग्यता के अनुसार ही विभाग बांटे थे। जामताड़ा के रहने वाले झगरू पंडित एक बेहतर किसान थे, इसलिए उन्हें कृषि मंत्री बनाया। वहीं, टुंडी के राजेंद्र तिवारी शिक्षक थे तो उन्हें शिक्षामंत्री बनाया। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सपनभापति टुंडी के कोशवा टुडू एवं महामंत्री टुंडी के ही कीनू मांझी थे। शिबू सोरेन के सहयोगी रहे टुंडी निवासी धानो सोरेन बताते हैं कि जितने भी मंत्री थे सभी क्षेत्र में घूमकर अपने विभाग से जुड़ी समस्याओं को शिबू सोरेन तक पहुंचाते थे।





