पारंपरिक रूप से मागे पोरोब का किया गया आयोजन
खरसावां के कुचाई प्रखंड में तिलोपदा में पारंपरिक मागे पोरोब का आयोजन हुआ। विधायक दशरथ गागराई ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया और नृत्य किया। यह पर्व प्रकृति की पूजा करता है और समुदाय की एकता को दर्शाता है। इस अवसर पर हो भाषा में मागे गीतों का प्रदर्शन भी किया गया।

खरसावां। कुचाई प्रखंड के तिलोपदा में पारंपरिक रूप से मागे पोरोब का आयोजन किया गया। खरसावां विधायक दशरथ गागराई सह पत्नी बासंती गागराई के साथ पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। इस दौरान सभी रश्मों को निभाया गया। मागे पोरोब में विधायक मांदर व नगाड़े के थाप पर समाज के लोगों के साथ नृत्य भी किया। मौके पर गागराई ने कहा कि समाज के लोग संगठित होकर संस्कृति की रक्षा करें। मागे पोरोब में प्रकृति यानी जल, जंगल, जमीन की पूजा होती है। गांव के बड़े बुजुर्ग, माताओं, बहनों, युवा साथियों के साथ मिलकर मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति पूजक जनजाति समुदाय को सामूहिकता और समग्रता को दर्शाता है।
यह पर्व न केवल प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है बल्कि सहज सरल एवं संतुलित जीवन पद्धति को भी दर्शाता है जो अनुकरणीय है।हो समुदाय में प्रचलित यह कहावत सेनगे सुसुन, काजी गे दुरंग अर्थात चलना ही नृत्य और बोली ही संगीत उनके जीवन शैली में दार्शनिकता की छाप होती है। इस दौरान हो भाषा में मागे गीत को अलग-अलग अंदाज में पेश कर समां बांध दिया। निमिन बुगिन मागे जो पोरोब, रांसा आदाओआ, बाटी गोजेन बाटी गोजेन…मागे ना पोरोब, ताराबु मेनटे, निमिन बुगिन मागे ना पोरोब… आदि मागे गीतों पर लोग मांदर की थाप पर झूमते नजर आ रहे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
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