राजनगर के जोरटांड में रोजो पर्व पर गूंजा छऊ नृत्य, उड़ीसा-बंगाल से उमड़े दर्शक
राजनगर प्रखंड के बनकटी गांव में जैठ संक्रांति के अवसर पर छऊ नृत्य का भव्य आयोजन किया गया। इस बार सरायकेला शैली की महिला संप्रदाय ने प्रस्तुति दी, जिसमें चारों युगों का समावेश था। भीड़ में हजारों दर्शक शामिल हुए, जिन्होंने इस सांस्कृतिक समारोह का आनंद लिया। आयोजकों का उद्देश्य संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ना है।
राजनगर प्रखंड के बनकटी गांव स्थित जोरटांड टोला में जैठ संक्रांति यानी रोजो पर्व के पावन अवसर पर पारंपरिक छऊ नृत्य का भव्य आयोजन किया गया। इस बार आयोजन की खास बात रही सरायकेला शैली की महिला संप्रदाय द्वारा प्रस्तुत किया गया छऊ नृत्य, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में कलाकारों ने छऊ नृत्य के माध्यम से चारों युगों — सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग — का जीवंत समावेश दिखाया। नृत्य में शैववाद और वैष्णव वाद से जुड़े धार्मिक प्रसंगों को लोक नृत्य उत्सव की शैली में संरचित रूप से प्रस्तुत किया गया। ढोल-नगाड़े, शहनाई और धामसा की थाप पर कलाकारों के पौराणिक वेशभूषा और मुखौटों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।
हजारों की भीड़, तीन राज्यों से पहुंचे लोगइस सांस्कृतिक आयोजन को देखने के लिए सिर्फ स्थानीय ग्रामीण ही नहीं, बल्कि उड़ीसा, बिहार और पश्चिम बंगाल के दूरदराज इलाकों से भी हजारों की संख्या में दर्शक जोरटांड पहुंचे थे। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में हर आयु वर्ग के लोगों ने पूरे उत्साह से भाग लिया। आयोजकों ने बताया कि रोजो पर्व पर छऊ नृत्य की परंपरा वर्षों पुरानी है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और पौराणिक गाथाओं से जोड़ना है। सरायकेला शैली की महिला संप्रदाय द्वारा प्रस्तुति इस बार आकर्षण का मुख्य केंद्र रही, क्योंकि आमतौर पर छऊ नृत्य पुरुष प्रधान माना जाता है। स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन न सिर्फ मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि झारखंड की समृद्ध लोक कला को जीवित रखने का माध्यम भी हैं। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
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