छऊ महोत्सव : भाव-भंगिमा और लय-ताल का संग, मेघदूत पर ठहरीं आंखें
राजकीय छऊ महोत्सव सरायकेला में 6 से 8 अप्रैल तक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने उत्कृष्ट नृत्य प्रस्तुत किया और विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए। विकास मेला में 30 स्टॉल्स लगाए गए। इस आयोजन में छऊ नृत्य की सांस्कृतिक महत्ता पर जोर दिया गया।

सरायकेला, संवाददाता। राजकीय छऊ महोत्सव रात्रि जागरण व रंगारंग कार्यक्रम के बीच सोमवार देर रात एक खुशनुमा यादगार के समाप्त हो गया। इसके गवाह बने बिरसा मुंडा स्टेडियम में मौजूद हजारों कलाप्रेमी। तीन दिनी महोत्सव के अंतिम दिन कार्यक्रम का शुभारंभ मंच पूजन व मंगलाचरण के यात्रा घट के साथ शुरू हुआ।सर्वप्रथम सरायकेला राजकीय कला केंद्र के कलाकारों ने आरती नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोहा। कलाकार गोपाल पटनायक, प्रदीप कवि, अविनाश कवि, कुना सामल, असित पटनायक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हर पार्वती देवनारायण सिंह, नीरज पटनायक एवं प्रदीप बसा जैसे कलाकारों ने प्रस्तुत किया। कालिया दमन महिला कलाकार श्रेया कर, रात्रि नृत्य सुदीप, पंकज, अमन व सुमंत द्वारा प्रस्तुत किया गया।6
अप्रैल से 8 अप्रैल तक छऊ नृत्य कला केंद्र में आयोजित ग्रामीण छऊ नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले सरायकेला, मानभूम एव खरसावां शैली के कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुत किया।आज कार्यक्रम के दौरान सरायकेला, खरसावां एंव मानभूम शैली में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छऊ दलों को क्रमश: 40 हजार, 30 हजार तथा 20 हजार रुपये के पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र से अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही मीडिया क्षेत्र से जुड़े पत्रकारों को मोमेंटो व शॉल देकर मंच पर अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।विकास मेला में दी गयी योजनाओं की जानकारी : महोत्सव के दौरान विकास मेला का भी आयोजन किया गया था, जिसमे 30 स्टॉल लगाए गए थे। विभिन्न तरह के क्राफ्ट के सामान के अलावा सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को स्टॉल के माध्यम से लोगों तक सूचना पहुंचायी गयी। महोत्सव के दौरान विधि व्यवस्था काफी चुस्त-दुरुस्त देखी गयी।सरायकेला छऊ हमारी संस्कृति : सोनाराम बोदराजिला परिषद के अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा कि सरायकेला छऊ हमारी संस्कृति से जुड़ा है। इससे रोजगार के अवसर के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। नगर अध्यक्ष मनोज चौधरी ने कहा कि सरायकेला की धरती में छऊ नृत्य रचा-बसा है। यहां का छऊ ऐसे ही विश्व मे प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि कलाकारों के दिन रात की गयी मेहनत का परिणाम है। जबतक कलाकारों को सम्मान दिया जाएगा, तबतक छऊ नृत्य जीवित रहेगा।ये रहे मौजूद : मौके पर परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बीरेश कुमार, जिला परिषद सोनाराम बोदरा, नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी, उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मुकेश लुणायत, एडीसी जयबर्धन कुमार, डीएससी कैलाश मिश्र, प्रशिक्षु डीएसपी पूजा कुमारी, एसडीपीओ समीर सावैया, एसडीओ अभिनव प्रकाश, बीडीओ, सीओ समेत कई वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।
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