सरायकेला की छऊ परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर मिला बड़ा सम्मान गुरु सुशांत और कुना हुए सम्मानित
सरायकेला के दो कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से नवाजा गया है। नगर पंचायत कार्यालय में सम्मानित करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नगर अध्यक्ष मनोज चौधरी ने कहा कि यह सम्मान सरायकेला की गौरवशाली छऊ परंपरा का सम्मान है।

सरायकेला। झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विश्व प्रसिद्ध सरायकेला छऊ परंपरा ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सरायकेला के दो कलाकारों को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से नवाजा गया है। इसी क्रम में गुरुवार को सरायकेला नगर पंचायत कार्यालय में दोनों कलाकारों को सम्मानित करने के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी ने शॉल ओढ़ाकर और फूलों का गुलदस्ता देकर दोनों कलाकारों को सम्मानित किया। नगर अध्यक्ष मनोज चौधरी ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ किसी एक कलाकार का नहीं, बल्कि सरायकेला की गौरवशाली छऊ परंपरा का सम्मान है।
सम्मान समारोह
मौके पर पद्मश्री शशधर आचार्य, गुरु बजेंद्र पट्टनायक, भोला महांती, रुपेश साहु, संतोष कर, सुदीप कवि, अविनाश कवि, राजतेंदु रथ, तपन पट्टनायक सहित कई कलाकार उपस्थित थे।
आगे का सफर
सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण कला के गुरु सुशांत कुमार महापात्र को 2025 के लिए प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी सम्मान दिया जाएगा। छऊ नृत्य में मुखौटा बनाने की विलक्षण कला को देश-विदेश में पहचान दिलाने में इनका योगदान रहा है। सरायकेला छऊ के जाने-माने और प्रतिभाशाली युवा कलाकार कुना सामल का चयन प्रतिष्ठित "उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार" के लिए किया गया है। यह पुरस्कार देश के 40 वर्ष से कम आयु के उन चुनिंदा युवा कलाकारों को दिया जाता है जो कला साधना के जरिए अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
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