संथाली भाषा और संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन को लेकर संथाली समर कैंप की शुरुआत
राजनगर में संथाली भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए शनिवार को संथाली समर कैंप की शुरुआत हुई। इस कैंप का उद्घाटन प्रमुख व्यक्तियों द्वारा किया गया। बच्चों को ओलचिकी लिपि में संथाली भाषा सीखने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कैंप का उद्देश्य नई पीढ़ी में सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देना है।

राजनगर। माझी परगना महाल कुचूंग दिशोम की पहल पर संथाली भाषा और संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन को लेकर शनिवार से संथाली समर कैंप की शुरुआत हुई। इसका उद्घाटन गोविंदपुर स्थित माझी परगना हाउस में देश परानिक नवीन मुर्मू, मचेत (शिक्षक) धनुराम मुर्मू ने विभिन्न गांवों के माझी बाबाओं और नायके बाबाओं की उपस्थित में हुआ। मौक़े पर देश परानिक नवीन मुर्मू एवं मचेत (शिक्षक ) धनुराम मुर्मू ने बताया कि समर कैंप के माध्यम से बच्चों को संथाली भाषा को ओलचिकी लिपि में पढ़ने, लिखने और बोलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही संथाली साहित्य, लोक कथाएं, गीत, नृत्य एवं पारंपरिक संस्कृति से भी बच्चों को परिचित कराया जाएगा।
कैंप का उद्देश्य नई पीढ़ी में अपनी भाषा एवं सांस्कृतिक पहचान के प्रति गर्व और जुड़ाव पैदा करना है। कैंप के दौरान बच्चों के लिए रचनात्मक, ज्ञानवर्धक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएगी₹। ऐसा कर ग्रीष्मावकाश को उपयोगी बनाया जाएगा। संथाली भाषा को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रयास हो सकेगा। कैंप में अनुभवी ओलचिकी विशेषज्ञ, संथाली साहित्यकार एवं प्रशिक्षित शिक्षक प्रशिक्षण देंगे।इधर, जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, झारखंड शिक्षा परियोजना, सरायकेला-खरसावां से ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान जिले के विद्यालयों में वर्ग कक्ष उपलब्ध कराने की अनुमति भी मांगी गई। ताकि 22 मई से 10 जून तक जिले के विभिन्न विद्यालयों में सुबह 7 बजे से 9:30 बजे तक नि:शुल्क संथाली समर कैंप संचालित किया जा सके।
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