महालिमोरूप रेलवे स्टेशन के यात्री समस्याओं के समाधान के लिए ऑडिटर को सौंपा गया ज्ञापन
खरसावां। दक्षिण पूर्व सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों ने महालिमोरुप रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। यात्रियों ने 312 हस्ताक्षरों के साथ समस्याओं का ज्ञापन सौंपा। स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज की कमी और मुरुप रेलवे फाटक पर घंटों इंतजार जैसी समस्याएँ हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए रोड ओवर ब्रिज की आवश्यकता है।

खरसावां। दक्षिण पूर्व सेंट्रल रेलवे बिलासपुर से चक्रधरपुर रेल मंडल अंतर्गत महालिमोरुप रेलवे स्टेशन व मुरुप रेलवे फाटक का सेफ्टी ऑडिट इंस्पेक्शन करने पहुंचे आला अधिकारियों को महालिमोरूप रेलवे स्टेशन के यात्री समस्याओं से संबंधित ज्ञापन प्रतिनिधि मंडल द्वारा सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल में मुरुप पंचायत के मुखिया तापस कुमार महतो, पंचायत समिति सदस्य अनिता प्रधान, गुराडीह एवं रेन्गुडीह के ग्राम प्रधान क्रमश: अश्वनी कुमार सिंहदेव व हृदयानंद महतो, युवा सामाजिक कार्यकर्ता हेमसागर प्रधान, अनिरुद्ध प्रमाणिक, अजीत प्रधान, गुरुपद महतो, डॉ. सदानंद महतो, परमेश्वर महतो, जगन्नाथ प्रधान, तपन मंडल, मनोज प्रधान, विकास प्रमाणिक आदि शामिल थे। ज्ञापन में महालिमोरूप स्टेशन क्षेत्र के मुखिया,पंचायत समिति सदस्य,वार्ड सदस्य, ग्राम प्रधान समेत 312 लोगों का हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन में कहा गया कि महालिमोरूप रेलवे स्टेशन से होकर रोजाना सैकड़ों यात्री व मालवाहक ट्रेनों का परिचालन किया जाता है। इससे रेलवे को अच्छा-खासा राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद यहां के यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
फुट ओवरब्रिज की समस्या :
महालिमोरूप रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म पर फुट ओवरब्रिज नहीं होने के कारण यात्रियों को मालगाड़ियों के नीचे से पटरी पार करनी पड़ती है। स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज की व्यवस्था अधूरी है। प्लेटफार्म संख्या 1, 2 और 3 पर फुट ओवरब्रिज है। लेकिन प्लेटफॉर्म संख्या 4 से 7 और 8 नंबर रेल लाइन पार करने के लिए फुट ओवरब्रिज की व्यवस्था ही नहीं है।
इन पटरियों पर घंटों मालगाड़ी खड़ी कर दी जाती है। ऐसी परिस्थिति में मजबूरन यात्री जान जोखिम में डाल कर ट्रेन के नीचे से आरपार होते हैं। इससे कभी भी दुर्घटना हो सकती है।
फ्लाई ओवर ब्रिज की मांग
हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग होने से अप और डाउन दोनों दिशाओं में लगातार ट्रेनों की आवाजाही से स्टेशन के नजदीक मुरुप रेलवे फाटक बंद रहता है। ऐसे में फाटक के दोनों ओर बसे दर्जन गांवों के लोगों को रेलवे फाटक बंद होने पर घंटों इंतजार करना पड़ता है। इस फाटक का लॉक स्टेशन मास्टर से कंट्रोल होने से गेटमेन इमरजेंसी में भी बंद फाटक को नहीं खोल सकता है।
ऐसी परिस्थिति में खासकर मरीजों और स्कूली बच्चों को विशेष परेशानी होती है। अतः यहां रोड ओवर ब्रिज का निर्माण अति आवश्यक है। इसके अलावा यात्रियों को यातायात में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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