राज पैलेस में छऊ कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से बांधा समां
सरायकेला के राज पैलेस में तीन दिवसीय छऊ नृत्य महोत्सव का भव्य समापन हुआ। इसका उद्देश्य पारंपरिक छऊ कला का संरक्षण और ग्रामीण कलाकारों को मंच प्रदान करना था। अंतिम दिन, केदार साहू आर्ट सेंटर के कलाकारों ने अद्भुत प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव ने इस कला को सांस्कृतिक विरासत बताया।

सरायकेला, संवाददाता। सरायकेला के राज पैलेस में आयोजित तीन दिवसीय छऊ नृत्य महोत्सव का सोमवार को भव्य समापन हो गया। चैत्र पर्व पर महोत्सव का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक छऊ कला का संरक्षण और ग्रामीण कलाकारों को एक सम्मानित मंच प्रदान करना था।महोत्सव के अंतिम दिन केदार साहू आर्ट सेंटर और कला पीठ सरायकेला के कलाकारों ने मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। पूरी रात चले इस नृत्य कार्यक्रम ने दर्शकों को अपनी जगह से हिलने नहीं दिया। कलाकारों के जीवंत प्रदर्शन और मुखौटों के माध्यम से प्रदर्शित पौराणिक कथाओं ने राज पैलेस के प्रांगण को ऐतिहासिक छटा से भर दिया।इस
आयोजन के संरक्षक राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव ने समापन के अवसर पर कहा कि छऊ केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने कहा कि इस कला को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाने और ग्रामीण प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ही महोत्सव की शुरुआत 11 अप्रैल को 'कला पीठ' के सहयोग से की गई थी।
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