भगवान को पाने के एक मात्र उपाय है भक्ति :भुक्ति प्रधान
संक्षेप: सरायकेला में आनन्द मार्ग प्रचारक संघ ने बाबा नाम केवलम कीर्तन का आयोजन किया। भक्ति और आसक्ति के बीच के अंतर को समझाते हुए भुक्ति प्रधान व गोपाल बर्मन ने बताया कि परम सत्ता के प्रति आकर्षण ही भक्ति है। इस कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
सरायकेला: आनन्द मार्ग प्रचारक संघ द्वारा बाबा नाम केवलम कीर्तन का आयोजन आनन्द मार्ग स्कूल कांड्रा के समीप में किया गया। इस मौके पर भुक्ति प्रधानव व गोपाल बर्मन ने बताया कि भक्ति का अर्थ परम सत्ता के प्रति आकर्षण है जब किसी सीमित सत्ता के प्रति आकर्षण होता है तब आसक्ति कहते हैं और जब आकर्षण परम सत्ता के प्रति होता है उसे भक्ति कहते हैं l भक्ति और आसक्ति में कोई समझौता नहीं है, हो सकता कोई मिलन बिंदु नहीं हो सकता। परम पुरुष के प्रति आकर्षण और सांसारिक वस्तु की प्रति आकर्षण दोनों एक साथ नहीं हो सकते।

आशक्ति में भाव रहता है कि मुझे भोग वस्तु की प्राप्ति हो जाए और भक्ति में भाव रहता है और परम पुरुष में मिल जाएं।जहां कोई इच्छा नहीं हो वही परम पुरुष वास करते हैं परमात्मा और सांसारिक इच्छा सूर्य और रात्रि के समान है। दोनों एक साथ-साथ इस्तेमाल नहीं हो सकती, इसीलिए भगवान कहते हैं जहां मेरे भक्त मेरा गायन करते हैं कीर्तन करते हैं मैं वही जाता हूं। कोई व्यक्ति बहुत ज्ञानी है कोई बहुत धनी है किंतु वे भक्त ह हो भी सकते हैं नहीं भी हो सकते हैं। मौके पर शंभू, कालीचरण , शिव प्रसाद, सूर्य प्रकाश सहित अन्य की सरहनीय भूमिका रही।

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