वित्त रहित शिक्षण संस्थानों ने नियमावली 2026 के ड्राफ्ट की प्रति जलाकर जताया विरोध
साहिबगंज में शिक्षकों ने झारखंड माध्यमिक विद्यालय स्थापना अनुमति व प्रस्वीकृति शर्त व बंधेज नियमावली 2026 के ड्राफ्ट का विरोध करते हुए इसे जलाया। प्राचार्य शंभनाथ पाठक ने कहा कि यह नियमावली शिक्षा नीति के खिलाफ है। आंदोलनकारियों ने सरकार से नियमावली में बदलाव की मांग की है।

साहिबगंज। झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षकेत्तर कर्मचारी के बैनर तले मंगलवार को यहां संध्या कॉलेज में प्राचार्य शंभनाथ पाठक के नेतृत्व में शिक्षक व कर्मचारियों ने झारखंड माध्यमिक विद्यालय स्थापना अनुमति व प्रस्वीकृति शर्त व बंधेज नियमावली 2026 के ड्राफ्ट की प्रति जलाकर विरोध जताया। मौके पर मौजूद शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर इस नियमावली को बदलने की मांग की । प्राचार्य ने कहा कि यह नियमावली शिक्षा नीति के खिलाफ है। यह नियम संगत नहीं और शिक्षकों के विरुद्ध है। इस नियमावली का दहन कर वित्त रहित शिक्षकों ने इसका पुरजोर विरोध किया । आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग है कि इस नियमावली में बदलाव करें और तर्क संगत शैक्षणिक सुधार एवं विद्यार्थी व वित्त रहित शिक्षक व उनके संस्थानों के हित में नियमावली बनाएं। उधर,आंदोलन को लेकर वित्तरहित शिक्षण संस्थानों में आज पठन-पाठन प्रभावित रहा। मौके पर शिक्षक प्राणनाथ तिवारी, सुमन कुमार, मोतीलाल साह, राजीव झा, शिवशंकर प्रसाद, वीरेन्द्र दुबे, अनुपमा झा आदि थे।
क्या है नयी नीति व शर्त जिसका मोर्चा विरोध कर रहा है
साहिबगंज। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत राज्य के वित्त रहित माध्यमिक विद्यालयों तथा इंटर कालेजों में नौवीं से 12वीं कक्षा तक पढ़ाई होगी तो माध्यमिक विद्यालयों में जहां वर्तमान में नौवीं एवं 10वीं की पढ़ाई होती है, जहां अब 12वीं तक पढ़ाई होगी। वहीं, इंटर कालेजों में वर्तमान में 11वीं एवं 12वीं की पढ़ाई होती है तो अब यहां नौवीं कक्षा से ही पढ़ाई शुरू होगी। दोनों श्रेणी के संस्थान अब माध्यमिक विद्यालय कहलाएंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की गठित कमेटी ने राज्य सरकार को इसकी अनुशंसा की है। कमेटी ने इसके लिए नया नियमावली का प्रारुप भी तैयार किया गया है, जिसमें संस्थानों को नौवीं से 12वीं तक की पढ़ाई की मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचनाएं, आवश्यक शिक्षकों एवं कर्मियों की संख्या तथा अन्य शर्तें निर्धारित की गई हैं। कमेटी ने इसके लिए झारखंड माध्यमिक विद्यालय (माध्यमिक कक्षा-9-12) स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति (शर्त एवं बंधेज) नियमावली, 2026 गठित किए जाने की अनुशंसा की है। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के मुताबिक इसमें मान्यता प्राप्त करने के लिए शर्तें निर्धारित की गई हैं। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे विद्यालय के लिए दो एकड़ तथा शहरी क्षेत्रों में एक एकड़ भूमि निबंधित या 30 साल की लीज अनिवार्य होगी। इसमें वर्ग कक्ष, प्रधानाचार्य कक्ष, कार्यालय कक्ष, पुस्तकालय, कामन रूम, प्रयोगशाला आदि के लिए भी क्षेत्रफल तय कर दिया गया है। विद्यालय के पास खेल का मैदान, न्यूनतम 50 हजार की पुस्तकों वाला पुस्तकालय, प्रयोगशाला आदि होना चाहिए। विद्यालय के पास गैर जनजातीय क्षेत्र में छह लाख तथा गैर जनजातीय क्षेत्र में चार लाख रुपये का सुरक्षा कोष होगा। विद्यालयों में शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियुक्ति झारखंड सरकारी माध्यमिक (कक्षा 09 से 12) आचार्य, प्रधानाचार्य एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियुक्ति एवं सेवाशर्त नियमावली, 2025 में निर्धारित योग्यता के आधार पर होगी। इसमें शिक्षकों के लिए आवश्यक योग्यता स्नातकोत्तर प्रशिक्षित निर्धारित की गई है। नियुक्ति में राज्य सरकार की आरक्षण नीति भी लागू होगी। इसी का विरोध वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा कर रहा है। मोर्चा का मानना है की शर्तें इतनी कठोर हैं कि कई संस्थान बंद हो जाएंगे।
नोट: उपरोक्त खबरों को एकसाथ देना है।
-----------------------------------------------------
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


