नवरात्र के तृतीया तिथि पर हुआ गणगौर विसर्जन
साहिबगंज में चैत नवरात्र के तीसरे दिन गणगौर का विसर्जन किया गया। यह उत्सव होली के दिन से शुरू होकर 16 दिनों तक चलता है। नवविवाहिताओं और कुंवारी कन्याओं ने भगवान शिव और माता गौरी की पूजा की। विसर्जन के समय लोग गंगा घाट पर एकत्रित हुए और सामूहिक रूप से गणगौर प्रतिमा को गंगा में प्रवाहित किया।

साहिबगंज। चैत नवरात्र के तीसरे नवरात्रा पर शनिवार को गणगौर का विसर्जन किया गया। होली के दिन से शुरू गणगौर उत्सव का समापन इसी के साथ हो गया। रंगोत्सव के दिन से ही नवविवाहिताओं व कुंवारी कन्याओं की ओर से गणगौर पूजन प्रारंभ किया गया था। गणगौर व्रत अधिकांशत: मारवाड़ी समाज की नवविवाहहिता व कुंवारी कन्याएं ही करती हैं। हाल के दिनों में कुछ अन्य समाज भी इस व्रत का विधि विधान से आयोजन करने लगा है। रंगोत्सव से शुरू गणगौर के दौरान व्रती भगवान शिव व माता गौरी यानि पार्वती की पूजा करीब सोलह दिनों तक करती हैं। मौके पर कुछ सामुहिक रूप से कुछ अपने घरों में गणगौर पूजन करती हैं।
रंगोत्सव से शुरू होने वाले इस व्रत का समापन नवरात्र की तृतीया को पवित्र नदी सरोवर आदि में गणगौर का विसर्जन कर होता है। शहर में गणगौर करने वाली देर शाम को स्थानीय बिजली घाट माथे पर गणगौर लिये पहुंच गंगा घाट पर पूजन आदि के बाद गणगौर को गंगा में प्रवाहित कर पति व अन्यों के स्वस्थ, सुखमय व दीघार्यु की प्रार्थना की। मौके पर गंगा घाट पर काफी लोग पहुंचे और विसर्जन में सहयोग किया। बरहेट में भी हुआ गणगौर प्रतिमा का विसर्जनबरहेट । मारवाड़ी समाज का त्योहार गणगौर शनिवार को उमंग व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। गणगौर की लोकगीतों के बीच नवविवाहितों व कुंवारी लड़कियों ने यहां के बड़े तालाब में गणगौर की प्रतिमा का विसर्जन किया। इसी के साथ 16 दिनों से चल रहा गणगौर का समापन हो गया। झारखंड प्रांतिय मारवाड़ी युवा मंच की बरहेट शाखा की पूर्व संयोजिका संध्या सिंघानिया ने कहा कि इस पर्व की शुरुआत होली दहन के दूसरे दिन से हो जाती है।
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