गंगा दशहरा : 15 हजार लीटर दूध,सवा क्विंटल लड्डू व बताशा ,1100 नारियल से गंगा पूजन
साहिबगंज में गंगा दशहरा पर गरम घाट व बिजली घाट भक्तिमय माहौल में डूबे रहे। उपाध्यक्ष सुनील यादव की अगुवाई में विशेष पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मां गंगा को 15,000 लीटर दूध, लड्डू, नारियल और अन्य सामग्री अर्पित की। पूरे घाट ‘हर-हर गंगे’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंजते रहे।

साहिबगंज: गंगा दशहरा पर साहिबगंज के गरम घाट व बिजली घाट भक्तिमय माहौल में डूबे नजर आए।
विशेष पूजा-अर्चना
जिला परिषद उपाध्यक्ष सुनील यादव की अगुवाई में मंगलवार की सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना शुरू की गई। पुरोहितों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से पूजन किया गया। मौके पर बनारस से आए डमरू वादकों की गूंज ने पूरे गंगा घाट क्षेत्र को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। गंगा दशहरा को लेकर सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। पूजा-अर्चना के बाद स्टीमर व नाव से मां गंगा को 15 हजार लीटर दूध, सवा क्विंटल लड्डू, सवा कुंटल बताशा, 1100 नारियल, 1100 कमल फूल, आम सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई। यह धार्मिक अर्पण यात्रा गरम घाट से शुरू होकर बिहार के मनिहारी गंगा घाट तक पहुंची और वहां से वापस साहिबगंज के बिजली घाट तक संपन्न हुई। उधर, बिजली घाट स्थित मुक्तेश्वर धाम मंदिर में शिवलिंग पर सवा क्विंटल दूध से अभिषेक किया गया। इस दौरान पूरा घाट ‘हर-हर गंगे’ व‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंजता रहा। मौके पर जिप उपाध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि गंगा दशहरा हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक पर्व है। ‘दशहरा’ का अर्थ दस प्रकार के पापों का नाश माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी को मोक्षदायिनी माना गया है और गंगा दशहरा पर जल, अन्न, वस्त्र, फल आदि का दान विशेष पुण्यदायी होता है। इसी आस्था और श्रद्धा के साथ मां गंगा की पूजा पूरे वैदिक मंत्र साधना एवं भक्ति भाव के साथ की गई।
सजावट
दोनों घाट को फूलों व रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया था।
फोटो 12, साहिबगंज में पूजा के दौरान मां गंगा को दूध अर्पित करते जिप उपाध्यक्ष।
सामान्य प्रश्न
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