DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मिसाल: झारखंड से पायलट की ट्रेनिंग लेकर वर्ल्ड टूर पर निकलेगी मां-बेटी

झारखंड से ग्लाइडर पायलट का प्रशिक्षण लेकर विश्व हवाई भ्रमण पर निकलनेवाली देश की पहली महिला होंगी आड्री दीपिका माबेन। दीपिका माबेन मूलत: मैसूर (कर्नाटक) की रहनेवाली हैं। दीपिका की बेटी एमी मेहता भी उनकी सहयोगी के रूप में विश्व हवाई भ्रमण पर निकलेगी। दीपिका अपने साथ अपनी बेटी को इस चुनौती भरे सफर पर इसलिए ले जाना चाहती हैं कि इससे अभिभावक यह सबक ले सकें जो अपने बच्चों को हवाई सेवा में भेजने से डरते हैं।

झारखंड आने का उद्देश्य

दीपिका के वर्ल्ड टूर के लिए एयरोटेक इंडिया ने इटली से सायनस ग्लाइडर मंगवाकर बेंगलुरू के जुकुर हवाई अड्डे पर एसेंबल करवाया है। देश में झारखंड ही ऐसा प्रदेश है, जहां सरकार के पास सायनस-912 मोटर ग्लाइडर है। इस वजह से उन्हें यहां प्रशिक्षण लेने आना पड़ा। झारखंड के नागर विमानन विभाग के मुख्य उड़ान अनुदेशक सह पायलट कैप्टन एसपी सिन्हा देश के एकमात्र मोटर ग्लाइडर प्रशिक्षक भी हैं। मां और बेटी को विश्व भ्रमण पर ले जाने वाला सायनस भारत में पंजीकृत पहला मोटर ग्लाइडर होगा।

प्रतिदिन छह घंटे और 800 किमी की उड़ान

दीपिका और एमी प्रतिदिन 6 से 7 घंटे मोटर ग्लाइडर उड़ायेंगी। इस दौरान वे 800 से 1000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी। ग्लाइडर में 30-30 लीटर ईंधन की क्षमता वाला टैंक है। वह हर ठहराव पर एक या दो दिन का विश्राम लेंगी। इस दौरान उस स्थान का भ्रमण भी करेंगी। यात्रा 80 दिन की है। एयरोटेक इंडिया ने ग्लाइडर के खड़ा करने, ईंधन और दोनों के आवासन की जवाबदेही उठायी है। बेंगलुरू से वह साउथ ईस्ट एशिया, जापान, रूस, अलास्का,उत्तरी अमेरिका, आइसलैंड , ग्रीनलैंड और अन्य यूरोपीय देश से होकर गुजरेंगी। तेहरान (ईरान), अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए स्वदेश (बेंगलुरू) वापसी होगी।

शौकिया पायलट हैं दीपिका माबेन

आड्री दीपिका माबेन मैसूर में आई कैन स्कूल की संचालिका हैं। शौकिया पायलट हैं। एनसीसी में 15 साल की उम्र में ही नामांकित हुईं। 1993 में सर्वश्रेष्ठ ग्लाइडर पायलट का अवार्ड जीता। आईआईटी कानपुर से वर्ष 2000 में ग्लाइडिंग का लाइसेंस लिया। वर्ष 2002 में माइक्रोलाइट का लाइसेंस प्राप्त किया। एयर रेस इंडिया (2003) में माइक्रोलाइट विमान के साथ अकेली महिला पायलट के रूप में प्रतिभागी रहीं। 2007 में डीजीसीए ने माइक्रोलाइट प्रशिक्षक का लाइसेंस दिया।

क्षमता को आंका नहीं जाता

दीपिका कहती हैं कि महिलाओं को यह एहसास कराया जाता है कि यह काम उसके लिए नहीं हैं। लेकिन अब समय आ गया है जब महिला भी ऊंचाई पर जा पायेंगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:World Tour to train pilots from Jharkhand