बोलीं महिलाएं आम जनता के लिए पढ़ाई और दवाई हो सस्ती

Apr 13, 2024 02:15 am IST
हिन्दुस्तान, रांची
 बोलीं महिलाएं आम जनता के लिए  पढ़ाई और दवाई हो सस्ती
संक्षेप:

लोकसभा चुनाव-2024 की सरगर्मियां जिस तरह तेज होती जा रही हैं, मतदाता भी अपने मुद्दों के साथ मुखर हो रहे हैं। विशेष रूप से आधी आबादी के निशाने पर सभी...

रांची, प्रमुख संवाददाता। लोकसभा चुनाव-2024 की सरगर्मियां जिस तरह तेज होती जा रही हैं, मतदाता भी अपने मुद्दों के साथ मुखर हो रहे हैं। विशेष रूप से आधी आबादी के निशाने पर सभी राजनीतिक पार्टियां हैं, क्योंकि वे महिलाओं को नेतृत्व में उचित प्रतिनिधित्व देने से कन्नी काटती हैं। क्या है आधी आबादी की उम्मीदें अपने जनप्रतिनिधियों से, किन कसौटियों और मुद्दों पर महिलाएं उन्हें परखेंगी इन सब पर वे खुलकर बोलीं। मौका था आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की ओर से शुक्रवार को आयोजित अनोखी चौपाल का। महिलाओं का कहना था कि मध्यवर्ग सबसे अधिक कर अदा करता है, पर उसे सुविधाएं नहीं मिलतीं। उन्होंने कहा कि विकास के सपने सभी नेता और राजनीतिक दल दिखाते हैं, लेकिन जब आम जनता के लिए पढ़ाई और दवाई सस्ती होगी, तभी हम मानेंगी कि विकास हुआ है। महिलाओं ने सुरक्षा, बेरोजगारी, मानव तस्करी जैसे मुद्दे उठाते हुए इस बात जोर दिया कि जनप्रतिनिधियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय की जानी चाहिए।

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खाना, घूमना सब महंगा

अनोखी चौपाल में आईं महिलाओं ने कहा कि बढ़ती महंगाई ने आम आदमी से खुशी और मनोरंजन छीन लिया है। पहले लोग सप्ताह में कम से कम एक दिन खासकर रविवार को परिवार के साथ किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते थे, लेकिन अब बाहर खाना काफी महंगा हो गया है। रेस्टोरेंट में बिल के साथ जीएसटी भी अच्छा-खासा जोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मल्टीप्लेक्स में परिवार के साथ फिल्म देखना एक सामान्य आयवर्ग का व्यक्ति नहीं सोच सकता, क्योंकि एक फिल्म देखने से उसके पूरे महीने का बजट बिगड़ जाएगा। रसोई गैस की कीमतों पर भी महिलाओं का गुस्सा फूटा। उनका कहना था कि चुनाव को देखते हुए रसोई गैस की कीमत कुछ घटा दी गई, लेकिन चुनाव होते ही कीमतें फिर आसमान छूने लगेंगी। कहा कि हमें चुनावी वादा नहीं धरातल पर बदलाव चाहिए। महंगाई से सबसे ज्यादा त्रस्त आम आदमी है और सरकार जिसकी भी बने इस पर ध्यान दे।

पढ़ने-कमाने के लिए प्रतिभा का पलायन हो रहा

महिलाओं का कहना था कि झारखंड में 12वीं के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के सीमित विकल्प हैं, इसके लिए हमें अपने बच्चों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद भेजना पड़ता है। पढ़ाई पूरी के बाद भी वे लौट नहीं सकते क्योंकि झारखंड में उनके लिए करियर के अवसर नहीं हैं। कमाने के लिए ही तो अपने बुजुर्ग मां-बाप को छोड़कर लोग महानगरों में जा रहे हैं। हमारी राजनीतिक पार्टियों के पास विकास का ऐसा कोई रोडमैप है क्या कि वे उद्योगों को अपने राज्य में लेकर आएं। झारखंड का भी कोई शहर आईटी हब बने। यहां भी रोजगार के अवसरों का सृजन हो।

महिलाओं ने कहा कि हमारे नेता अपने भाषणों में झारखंड को खनिज संपदा से संपन्न राज्य बताना नहीं भूलते, पर यह क्यों नहीं बताते कि इस समृद्धि के बावजूद हम पिछड़े क्यों हैं। उनका कहना था कि अगर सही राजनीतिक इच्छाशक्ति होती तो आज झारखंड भी विकसित राज्य होता और यहां के युवाओं को शिक्षा या नौकरी के लिए पालायन नहीं करना पड़ता।

सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधरे

अनोखी चौपाल में आईं महिलाओं ने यह मुद्दा भी उठाया कि निजी स्कूल फीस के नाम पर मनमानी करते हैं, जिस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा और संसाधनों की स्थिति दुरुस्त होती तो लोग बच्चों को निजी स्कूलों में क्यों भेजते। कहा कि ऐसा लगता है कि सरकारें भी चाहती हैं कि आम आदमी के बच्चे अधिक पैसे खर्च कर निजी स्कूलों में पढ़े, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो क्या सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारी नहीं जाती। महिलाओं ने कहा कि निजी स्कूल नामांकन से लेकर, किताब-कॉपी बेचने तक में कमाई कर रहे हैं। एक औसत कमाई करनेवाले परिवार का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई पर खर्च हो जा रहा है। सरकारी स्कूलों में उच्च स्तरीय शिक्षा मिलती तो इस अनावश्यक खर्च से लोग बच जाते।

कला-संस्कृति और साहित्य का माहौल नहीं

महिलाओं ने यह मुद्दा भी उठाया कि राज्य में कला-संस्कृति और साहित्य के लिए उचित मंच नहीं है। यहां न तो कोई भाषा अकादमी है और न स्थानीय कलाकारों व साहित्यकारों को ऐसा कोई मंच सुलभ हो पाता है, जहां लोग उनको सुन करें। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य राज्यों की तरह यहां कलाकारों और साहित्यकारों को सम्मान क्यों नहीं दिया जाता, ये भी मतदाता हैं। उन्होंने रवींद्र भवन में बनने में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। साथ ही, स्थानीय कलाकारों व साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के स्तर पर सम्मान व पुस्कार शुरू करने की भी मांग की। कहा कि जब पड़ोसी राज्य बंगाल, ओड़िसा, बिहार, उत्तर प्रदेश में कलाकारों व साहित्यकारों को सम्मान और पुरस्कार मिल सकता है तो हमारे अपने राज्य में क्यों नहीं। महिलाओं ने जाति के आधार पर आरक्षण दिए जाने की नीति में भी बदलाव की मांग की। कहा कि अब समय आ गया है कि आर्थिक आधार पर सभी जातियों को आरक्षण का लाभ मिले।

शिक्षित बेरोजगार क्यों रहें?

महिलाओं ने सवाल उठाया कि आखिर शिक्षित बेरोजगार क्यों हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी देश या राज्य के लिए इससे शर्मनाक बात क्या होगी कि एक एमए-एमएससी युवक नौकरी नहीं मिलने पर ऑटो चलाने को बाध्य हैं। बीएड करने के बाद युवक-युवतियां ट्यूशन पढ़ाने को मजबूर हैं, क्योंकि शिक्षकों की सरकारी नौकरियां निकल ही नहीं रही हैं। एमए, एमएससी, एमकॉम उत्तीर्ण, नेट-जेआरफ में सफल पीएचडी किए हुए युवा विश्वविद्यालयों में अनुबंध पर घंटी आधारित शिक्षक बनने को मजबूर हैं, यह प्रतिभा का दुरुपयोग नहीं तो क्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यूपीएससी की परीक्षा हर वर्ष हो सकती है तो विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सालों साल इंतजार क्यों करना पड़ता है।

नेताओं के लिए भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय हो

अनोखी चौपाल में महिलाओं ने स्वच्छ और ईमानदारी छवि वाले शिक्षित नेताओं को चुनने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक सुरक्षा गार्ड की भी नियुक्ति की जाती है, तो उसकी भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता देखी जाती है। लेकिन भारतीय नेताओं के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं है। कहा कि अगर शिक्षित लोग भारतीय राजनीति में आएंगे, तो वे देश का नेतृत्व अधिक कुशलता और नवीन दृष्टिकोण के साथ कर पाएंगे। महिलाओं ने कहा कि शिक्षित लोग आएंगे, तभी शिक्षा की स्थिति भी सुधरेगी।

हमें दीजिए सुरक्षा की गारंटी

महिलाओं ने अपने लिए सुरक्षा की गारंटी भी मांगी। साथ ही, शासन और नीति निर्धारण में पर्याप्त महिला नेतृत्व की भी मांग की। कहा कि राजनीतिक पार्टियां आधी आबादी को वोट के तौर चुनाव के समय भुनाती हैं, लेकिन महिलाओं को चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं देतीं। जब तक महिलाएं नेतृत्व में नहीं आएंगी, तबतक महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे मुद्दों पर महिला हितैषी दृष्टिकोण से काम नहीं हो पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि शाम 7 बजे के बाद महिलाएं, लड़कियां घर से बाहर निकलने में सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं, जिसकी भी सरकार बने हमें हमारी सुरक्षा की गारंटी चाहिए।

महिलाओं के पांच मुद्दे

महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य

युवाओं के लिए रोजगार

सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार

बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण

कला-संस्कृति, साहित्य को बढ़ावा

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