Ranchi News: तोरपा में बरसात में भी पेयजल के लिए हाहाकार, पांच माह से 2100 घरों के नल सूखे
Ranchi News: तोरपा के लोग सावन-भादो की बारिश में भी एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। पिछले पांच महीनों से जलापूर्ति ठप होने के कारण 2100 परिवार गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। लोग पानी खरीदने को मजबूर हैं, जबकि प्रशासन और विभाग के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है।

Ranchi News: तोरपा, प्रतिनिधि। सावन-भादो की झमाझम बारिश के बीच भी तोरपा के लोग एक-एक बूंद पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। हैरानी की बात है कि चारों ओर पानी ही पानी होने के बाद भी घरों में नल से जल नहीं आ रहा है। पिछले पांच महीने से जलापूर्ति ठप रहने से पूर्वी तोरपा, पश्चिमी तोरपा, अम्मा और दियांकेल पंचायत के करीब 2100 परिवार गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। आलम यह है कि बरसात में भी लोगों को पीने और नहाने तक के लिए जार का पानी खरीदना पड़ रहा है। सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे डिब्बा-बाल्टी लेकर चापाकल और दूर के स्रोतों की ओर निकल पड़ते हैं। कई परिवार तो कारो नदी के गंदे पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। समस्या को लेकर विभाग और प्रशासन के खिलाफ लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है。
हर बार नया बहाना, स्थायी समाधान नहींः
तोरपा में जलापूर्ति ठप होना कोई नई बात नहीं है। कभी कारो नदी में पानी की कमी का बहाना, कभी मोटर खराब, कभी ब्लीचिंग और केमिकल खत्म होने और कभी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने का हवाला देकर सप्लाई रोक दी जाती है। हर बार लिपापोती कर दी जाती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए न विभाग गंभीर है और न जनप्रतिनिधि।
नौ करोड़ की योजना फेलः
वर्ष 2017-18 में नौ करोड़ रुपये की लागत से तोरपा शहरी क्षेत्र के लिए ग्रामीण जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी। कारो नदी में इंटेकवेल और कोटेंगसेरा में पांच लाख लीटर क्षमता की विशाल जलमीनार बनाई गई। हर घर में नल लगाया गया। लोगों को लगा था कि अब पेयजल संकट खत्म हो जाएगा, लेकिन रख-रखाव के अभाव में यह महत्वाकांक्षी योजना भी दम तोड़ती नजर आ रही है। करोड़ों की योजना के बाद भी बरसात में नलों से पानी नहीं आना सिस्टम की पोल खोल रहा है।
एक-दूसरे पर ठीकराः
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारी कहते हैं कि जलापूर्ति सुचारू रखना संचालन समिति की जिम्मेदारी है, विभाग सिर्फ तकनीकी मदद देता है। वहीं ग्रामीण जलापूर्ति समिति की अध्यक्ष सह मुखिया विनीता नाग का कहना है कि लंबे समय से जलापूर्ति ठप रहने से उपभोक्ता जलकर नहीं दे रहे हैं। पांच लाख रुपये से अधिक जलकर बकाया होने से मेंटेनेंस और कर्मियों का वेतन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा मरम्मत का काम चल रहा है। पुरानी मशीनों को ठीक कराया जा रहा है। जल्द ही पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पेयजल की इस गंभीर समस्या का अविलंब स्थायी समाधान करने की मांग की है।


