शहर का पारा 40 के पास, जलापूर्ति नियमित नहीं होने से लोग बेहाल

हिन्दुस्तान, रांची
Follow us on Google News
share

फोटो भी है - लगातार बढ़ते तापमान के बीच जरूरतभर पानी के लिए सुबह

शहर का पारा 40 के पास, जलापूर्ति नियमित नहीं होने से लोग बेहाल

फोटो भी है - लगातार बढ़ते तापमान के बीच जरूरतभर पानी के लिए सुबह से भागदौड़ कर रहे लोग- मजबूरन बाजार से जार और बोतलबंद पानी की खरीदारी कर चला रहे घरों में काम- 18 वार्ड, 60 स्लम क्षेत्र के लोग पानी को लेकर सबसे ज्यादा परेशान- मलिन बस्तियों के आसपास निगम की मिनी एचवाईडीटी तथा चापानल पर भी कतार- सुबह से पानी की जद्दोजहद, बच्चों के स्कूल जाने से लेकर ऑफिस जाने में आ रही दिक्कत- रुक्का से जलापूर्ति बंद रहने से दिनभर बेहाल रहे नल पर निर्भर सात लाख से अधिक लोग- निगम के टैंकरों का फेरा बढ़ा, फिर भी प्रभावित इलाके के लोगों तक पानी पहुंचाना चुनौतीरांची, प्रमुख संवाददाता।

मौसम के बिगड़े मिजाज के बीच रांची का पारा 40 डिग्री के आसपास कायम है। उमस भरी गर्मी और तेजी से नीचे जाते भूगर्भ जलस्रोत से निगम क्षेत्र में पेयजल को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। पीएचईडी की ओर से मंगलवार को रुक्का जलशोधन केंद्र में संप की सफाई और मरम्मत को लेकर शहर में नल से जल की आपूर्ति नहीं की गई। इस कारण सात लाख से अधिक की आबादी दिनभर जरूरत भर पानी को लेकर बेहाल रही।शहर में फरवरी में निगम के दस वार्ड में पानी की किल्लत शुरू हुई थी, जो गर्मी बढ़ने के साथ 18 वार्ड तक जा पहुंची है। निगम के दस वार्ड पहले से ड्राई जोन में हैं, जहां बरसात के कुछ दिनों को छोड़कर पानी की समस्या बनी रहती है। भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन की वजह से ड्राई जोन वाले इलाके बढ़ते जा रहे हैं। इन सब के बीच शहर की 60 मलिन बस्तियों में लगे सरकारी चापानल भी जवाब देने लगे हैं। इस कारण मिनी एचवाईडीटी पर पानी लेने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है। गहराते जलसंकट के बीच निगम की रांची व डोरंडा वाटर बोर्ड शाखा की ओर से अभी उपलब्ध 65 टैंकर से ड्राई जोन वाले इलाके में पानी की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि, यह नाकाफी है।एक सप्ताह में 40 फेरा बढ़ा, फिर भी किल्लतशहर में पानी की बढ़ती मांग का अंदाजा इसी से लग सकता है कि पीएचईडी द्वारा पाइपलाइन से जलापूर्ति किए जाने के बावजूद निगम के टैंकरों का फेरा 40 प्रतिशत बढ़ गया है। मार्च के अंत तक वाटर टैंकरों का फेरा 60 तक था, जो अप्रैल के पहले सप्ताह में 80 तक और अभी 120 तक जा पहुंचा है। अभी वार्ड संख्या 17, 18, 27, 28 और 34 में पहले से चल रहे तीन-तीन टैंकरों के स्थान पर छह-छह टैंकर चलाने की मांग आमजन कर रहे हैं। 181 एचवाईडीटी व 1611 मिनी एचवाईडीटी पर पानी लेने वालों की हर दिन लंबी कतार लग रही है। इसके बावजूद लोगों को हर दिन प्रति व्यक्ति 30 गैलन मानक के हिसाब से पानी नहीं मिल रहा है।18 वार्ड, 60 स्लम क्षेत्र के लोग पानी को लेकर सबसे ज्यादा परेशाननिगम के 18 वार्ड के लोग पानी को लेकर सबसे ज्यादा परेशान हैं। वार्ड संख्या नौ, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 34, 35, 37, 38, 39, 49, 52, 53 और 55 समेत कई अन्य वार्ड में सभी गली-मुहल्लों में अभी तक मिसिंग पाइप लाइन नहीं बिछी है। जहां बिछी है, वहां जलापूर्ति शुरू नहीं हुई है। ये सभी वार्ड ड्राई जोन वाले हैं। ऐसे इलाके में पानी पहुंचाने की जिम्मेवारी से पीएचईडी और निगम दूर है।दिनचर्या हो रही बाधितजिन इलाकों में अनियमित तौर पर पानी की आपूर्ति की जा रही है, वहां के लोग कई तरह से परेशान हैं। उन इलाकों के वाशिंदों की दिनचर्या बाधित हो रही है। सुबह में घर की साफ-सफाई के साथ भोजन पकाने, स्नान, कपड़े साफ करने का काम बाधित हो रहा है। जरूरत भर पानी नहीं मिलने से लोगों को खरीद कर जार लाना पड़ रहा है।औसत 10 से 25 मीटर नीचे चला गया जलस्त्रोतअत्यधिक दोहन के कारण शहर में औसत 10 से 25 मीटर नीचे जल स्त्रोत चला गया है। भूगर्भ जल स्त्रोत के नीचे जाने का सबसे ज्यादा असर कांके रोड, हरमू रोड, लालपुर, चुटिया, डोरंडा, अरगोड़ा, हिंदपीढ़ी, एचईसी एवं शहर के पश्चिमी इलाके में दिख रहा है।बड़ी आबादी लो प्रेशर से बेहालवितरण व्यवस्था में गड़बड़ी की वजह से जिन इलाकों से मेन पाइप लाइन गुजरी है, वहां पर पानी का प्रेशर कुछ ठीक जरूर रहता है, लेकिन इसके आसपास की लूप पाइप लाइनों से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। सभी को यह पता है कि शहर के हर इलाके में अनियमित पानी की आपूर्ति होती है। इसके लिए कोई समय भी तय नहीं है।2.40 लाख होल्डिंग और 66 हजार कनेक्शनरांची नगर निगम क्षेत्र के 2.40 लाख मकान होल्डिंग दस्तावेज में दर्ज हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, शहर की आबादी 10.74 लाख है। निगम हर दिन 311 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति करता है। शहर में 66 हजार वैध कनेक्शन हैं। इसमें सरकारी एवं सार्वनजिक क्षेत्र के प्रतष्ठिान रिम्स, सीसीएल, आईआईसीएम, सीआईपी, रिनपास, गैरिसन, एचईसी, मेकॉन, सेल समेत 12 वैसे बल्क कनेक्शनधारी शामिल हैं, जहां सरकारी कार्यालय एवं आवासीय परिसर में जलापूर्ति की जाती है। इससे साफ है कि शहर की बड़ी आबादी को नल से जल से नहीं मिल रहा है।रांची में जलसंकट: 40 डिग्री पारे के बीच नल से जल को तरस रही सात लाख की आबादीड्राई जोन में तब्दील होते रांची के 18 वार्ड: 25 मीटर तक नीचे गिरा भूगर्भ जल स्तरपानी पर पहरा: पीएचईडी के मरम्मत कार्य ने बढ़ाई परेशानी, टैंकरों के फेरे 40% बढ़ेरांची की 60 मलिन बस्तियों में हाहाकार: दम तोड़ते चापानल और पानी के लिए लंबी कतारें2.40 लाख घर और मात्र 66 हजार कनेक्शन: रांची में गहराती प्यास और डगमगाती व्यवस्था

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

Hindi NewsJharkhand NewsRanchi Newsशहर का पारा 40 के पास, जलापूर्ति नियमित नहीं होने से लोग बेहाल