Ranchi News: खूंटी के कर्रा अंतर्गत जमहार अम्बा टोली की कच्ची सड़क
Ranchi News: खूंटी जिले के जमहार अम्बा टोली में 20 परिवारों के लोग बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। यहाँ न सड़क, न पेयजल, न शिक्षा, न स्वच्छता की सुविधाएँ हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। कई बार चुनावी वादे हुए लेकिन समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं।

Ranchi News: खूंटी, प्रतिनिधि। कर्रा प्रखंड के उड़िकेल पंचायत अंतर्गत जमहार अम्बा टोली के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। करीब 20 परिवारों और 135 से अधिक आबादी वाले इस गांव में पक्की सड़क, पेयजल, शिक्षा, आवास, स्वच्छता, नाली, बिजली और सिंचाई जैसी जरूरी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाएं केवल कागजों और निर्माण कार्यों तक सीमित रह गई हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उन्हें उनका लाभ नहीं मिल रहा है। पक्की सड़क के अभाव में कच्चे रास्ते से आवागमन
सड़क की समस्या
खूंटी जिला को बने 19 वर्ष हो गए, लेकिन अब भी गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। इस दौरान कई चुनाव भी हुए। चुनाव के समय तमाम प्रत्याशी जनता से वोट मांगने पहुंचे। उन्होंने सड़क बनाने का वादा भी किया, लेकिन चुनाव बीतते ही ग्रामीणों की यह चिरप्रतीक्षित मांग ठंडे बस्ते में चली गई। ग्रामीण कच्चे रास्ते के सहारे आवागमन करते हैं। बारिश के दिनों में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है। कीचड़ एवं गड्ढों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में भी काफी परेशानी होती है।
जलमीनार की स्थिति
तीन साल पहले बनी जलमीनार, आज तक नहीं मिला पानी
गांव में करीब तीन साल पहले जलमीनार का निर्माण कराया गया था। जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन भी बिछाई गई और दो बोरिंग भी कराई गईं, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों के घरों तक पानी नहीं पहुंचा है। जलमीनार और पाइपलाइन होने के बावजूद पानी न मिलने से ग्रामीणों को पेयजल के लिए कुएं पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
चापाकल की स्थिति
दोनों चापाकल खराब, कुआं ही एकमात्र सहारा
जमहार अम्बा टोली में ग्रामीणों के लिए दो चापाकल लगाए गए हैं, लेकिन दोनों ही खराब पड़े हैं। गर्मी हो या बरसात, ग्रामीणों को पानी के लिए कुएं तक ही जाना पड़ता है। महिलाओं और बच्चों को रोजाना पानी की व्यवस्था करने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत कराने और जलमीनार से नियमित जलापूर्ति शुरू कराने की मांग की है।
आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति
गांव में जर्जर भवन में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र
गांव में आंगनबाड़ी केंद्र तो है, लेकिन उसका भवन जर्जर स्थिति में है। जर्जर भवन में बच्चों के बैठने और अन्य गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में लगातार चिंता बनी रहती है। ग्रामीणों ने आंगनबाड़ी केंद्र के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त भवन उपलब्ध कराने की मांग की है। भवन के जर्जर होने के कारण लोग अपने छोटे बच्चों को वहां भेजने से कतराते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनका पोषण भी प्रभावित हो रहा है।
शिक्षा की समस्याएं
गांव में सरकारी स्कूल नहीं, दूर जाने को मजबूर बच्चे
जमहार अम्बा टोली में कोई सरकारी स्कूल नहीं है। गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए कर्रा, जमहार, गोविंदपुर या खूंटी प्रखंड जाना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए यह दूरी और आवागमन की समस्या शिक्षा में बड़ी बाधा बन रही है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव में ही प्राथमिक स्तर की शिक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए।
स्वच्छता और नाली की स्थिति
नाली न होने से बारिश में बढ़ती है परेशानी
गांव में नाली का निर्माण नहीं कराया गया है। बारिश के दौरान घरों और रास्तों का पानी इधर-उधर बहता है। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने गांव में पक्की नाली निर्माण कराने की मांग की है।
सोलर लाइट की कमी
सोलर लाइट की सुविधा नहीं, अंधेरे में डूबी गलियां
जमहार अम्बा टोली में सार्वजनिक स्थानों पर सोलर लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। शाम ढलते ही गांव की गलियां अंधेरे में डूब जाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सोलर लाइट लगने से रात में आवागमन आसान होगा और सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर होगी। ग्रामीणों ने बताया कि शाम होते ही कच्चे रास्तों और अंधेरी गलियों में पैदल चलना जोखिम भरा हो जाता है, जिससे सांप और बिच्छू का डर बना रहता है। ग्रामीणों ने गांव के प्रमुख स्थानों पर सोलर लाइट लगाने की मांग की है।
सिंचाई की समस्याएं
सिंचाई के अभाव में प्रभावित हो रही खेती
गांव के लोगों की आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई की कोई समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहने के कारण किसानों को मौसम के भरोसे रहना पड़ता है। ग्रामीणों ने सिंचाई के लिए कुएं, तालाब, सोलर पंप या अन्य साधन उपलब्ध कराने की मांग की है।
स्वच्छता की समस्याएं
शौचालय का अभाव, खुले में शौच जाने की मजबूरी
गांव के सभी परिवारों को शौचालय की सुविधा नहीं मिल सकी है। कुछ ही परिवारों के पास शौचालय है, जबकि अधिकांश परिवार आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर परिवार को शौचालय उपलब्ध कराकर गांव को खुले में शौच से मुक्त (ODF) बनाया जाना चाहिए।
आवास की समस्याएं
अधिकांश परिवार खपड़ैल मकानों में रहने को विवश
आवास योजना का लाभ भी गांव के सभी जरूरतमंद परिवारों तक नहीं पहुंच पाया है। कुछ ही परिवारों को आवास मिला है, जबकि अधिकांश लोग अब भी टूटे-फूटे और पुराने खपड़ैल घरों में दिन काट रहे हैं। ग्रामीणों ने पात्र परिवारों का सर्वे कराकर प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है।
कोट:
गांव में सबसे बड़ी समस्या पानी की है। तीन साल पहले जलमीनार बनी और पाइपलाइन भी बिछी, लेकिन आज तक घरों में पानी नहीं पहुंचा। दोनों चापाकल खराब हैं।
मोहना आईन्द
गांव तक पक्की सड़क नहीं होने से बरसात के दिनों में काफी परेशानी होती है। कच्चे रास्ते पर कीचड़ और गड्ढों के कारण पैदल चलना मुश्किल हो जाता है।
हीरा आईन्द
गांव में सरकारी स्कूल नहीं है। बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है। सरकार को गांव में कम से कम प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
सुकरा आईन्द
गांव में कई परिवार आज भी टूटे-फूटे खपड़ैल घरों में रहने को मजबूर हैं। कुछ लोगों को ही आवास का लाभ मिला है। सभी पात्र परिवारों का सर्वे कर पक्का मकान उपलब्ध कराया जाए।
बिरसी आईन्द
गांव में शौचालय की सुविधा सभी परिवारों को नहीं मिली है। अधिकांश लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। पानी और स्वच्छता दोनों की समस्या है। सरकार अगर शौचालय के साथ पेयजल की व्यवस्था कर दे तो ग्रामीणों को काफी राहत मिलेगी।
बड़े आईन्द
गांव में सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है। इसके अलावा नाली और सोलर लाइट भी नहीं है। ग्रामीण लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है।
उज्जवल तोपनो


