
सिदरौल सहित पांच मौजा की कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज
बुढ़मू के ग्रामीणों ने 1500 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का विरोध किया है। 'ग्रामसभा जन संघर्ष मोर्चा' के नेतृत्व में, ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और कहा कि वे अपनी भूमि का अधिग्रहण स्वीकार नहीं करेंगे। उनका मानना है कि यह भूमि उनकी संस्कृति और आजीविका का हिस्सा है।
बुढ़मू, प्रतिनिधि। बुढ़मू अंचल क्षेत्र के मौजा सिदरौल, बाड़े, चकमे, आरा और मतवे के ग्रामीणों ने अपनी लगभग 1500 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि के प्रस्तावित अधिग्रहण का विरोध शुरू कर दिया है। ‘ग्रामसभा जन संघर्ष मोर्चा बुढ़मू’ के अध्यक्ष छेदनी उरांव, सचिव कृष्णा उरांव, क्षर्मेश भगत और बंधन टाना भगत के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बुढ़मू सीओ को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने साफ कहा है कि वे अपनी कृषि भूमि का अधिग्रहण स्वीकार नहीं करेंगे। विस्थापन के डर से विरोध कर रहे ग्रामीण हाल ही में हुए निरीक्षण, सर्वेक्षण और ड्रोन सर्वे से ग्रामीणों को आशंका है कि उनकी जमीन किसी नई परियोजना के लिए ली जा सकती है इससे उनमें विस्थापन का डर और गुस्सा बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह जमीन उनकी पीढ़ियों की आजीविका और सांस्कृतिक पहचान है। उनका कहना है कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून 1996 के दायरे में आता है, जिसके अनुसार ग्रामसभा की अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण नहीं हो सकता। ग्रामीणों ने ड्रोन सर्वे को कानून का उल्लंघन बताया। ग्रामसभा में सर्वसम्मति से जमीन नहीं देने का फैसला सभी ग्रामसभाओं ने सर्वसम्मति से जमीन नहीं देने का फैसला किया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द पहल नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कोट--- स्मार्ट सिटी या 1500 एकड़ जमीन अधिग्रहण को लेकर कोई भी दिशा-निर्देश वरीय पदाधिकारियों द्वारा नहीं दिया गया है। ग्रामीणों का विरोध या प्रदर्शन किस सूचना के आधार पर है, कहना मुश्किल है। -सच्चिदानंद वर्मा, सीओ, बुढ़मू।

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