
बुड़ीकाय टोला में शिक्षा की नई शुरुआत, ग्रामीणों ने श्रमदान से बनाया स्कूल शेड
अड़की प्रखंड के बिरबांकी पंचायत के बुड़ीकाय टोला में ग्रामीणों ने मिलकर शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने लकड़ी और बांस से एक स्कूल शेड का निर्माण किया है, ताकि बच्चे बुनियादी शिक्षा प्राप्त कर सकें। आईआईएम रांची के छात्रों का सहयोग भी इस प्रयास को मजबूती दे रहा है।
अड़की, प्रतिनिधि। अड़की प्रखंड अंतर्गत बिरबांकी पंचायत का बुड़ीकाय टोला आज़ादी के कई दशकों बाद भी बुनियादी शिक्षा से वंचित रहा है। गांव से निकटतम घाघरा विद्यालय की दूरी लगभग चार से पांच किलोमीटर है। दुर्गम रास्ते और संसाधनों की कमी के कारण यहां के 30 से 35 बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते थे। शिक्षा की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक इस टोला से एक भी छात्र मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सका है। गांव के सबसे शिक्षित व्यक्ति बोगन मुंडा हैं, जो स्वयं नन-मैट्रिक हैं। ग्रामीणों ने खुद संभाली शिक्षा की कमान: हालांकि अब बुड़ीकाय टोला में बदलाव की बयार बहने लगी है।
शिक्षा की आवश्यकता को समझते हुए ग्रामीणों ने स्वयं पहल करते हुए लकड़ी और बांस से एक स्कूल शेड का निर्माण शुरू कर दिया है। इस कार्य में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी बढ़-चढ़कर श्रमदान कर रहे हैं। सुबह से शाम तक लोग अपनी रोजमर्रा की मजदूरी के बीच समय निकालकर स्कूल शेड के निर्माण में जुटे हैं। गांव केलोगों का सामूहिक प्रयास बना मिसाल: ग्रामीणों का यह सामूहिक प्रयास इस बात का प्रतीक है कि वे अब अपने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं। जिन हाथों में अब तक केवल मजदूरी के औजार थे, वे आज अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहे हैं। गांव में शिक्षा को लेकर जागरूकता और उत्साह साफ नजर आ रहा है। आईआईएम रांची के छात्र कर रहे हैं सराहनीय सहयोग: निर्माणाधीन स्कूल शेड पर एस्बेस्टस शीट चढ़ाने का खर्च आईआईएम, रांची के विद्यार्थियों द्वारा चंदा एकत्र कर वहन किया जा रहा है। आईआईएम के छात्रों का यह सहयोग ग्रामीणों के आत्मविश्वास को और मजबूत कर रहा है तथा इस पहल को एक ठोस आधार प्रदान कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाहरी सहयोग मिलने से उनकी मेहनत को नई ऊर्जा मिली है। बोगन मुंडा संभालेंगे पढ़ाने की जिम्मेदारी: ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल शेड के तैयार होते ही गांव के छोटे बच्चों की पढ़ाई यहीं शुरू कर दी जाएगी। बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी गांव के ही बोगन मुंडा निभाएंगे। उन्हें आईआईएम, रांची की ओर से प्रति माह पांच हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई नियमित और सुचारू रूप से संचालित हो सके। उम्मीद और बदलाव की कहानी: बुड़ीकाय टोला में बन रहा यह स्कूल शेड केवल एक अस्थायी ढांचा नहीं, बल्कि शिक्षा की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है। यह उस गांव की कहानी है, जो लंबे अंधकार के बाद अब ज्ञान, जागरूकता और उम्मीद की रोशनी की ओर अग्रसर हो रहा है।

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