हिन्दू समाज की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट हों संत: स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी

Newswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की बैठक हुई, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। साधु-संतों ने पश्चिम बंगाल में हुई मारपीट की निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बच्चों को संस्कार देने और गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित करने पर भी चर्चा हुई।

हिन्दू समाज की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट हों संत: स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी

रांची, वरीय संवाददाता। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की प्रान्तीय मार्गदर्शक मंडल सह साधु-संतों की बैठक रविवार को अपर बाजार स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में हुई। बैठक में मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया गया। इस दौरान पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में साधु-संतों के साथ हुई मारपीट की घटना पर संतों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। घटना की निंदा करते हुए केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय से दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की मांग की गई। प्रान्तीय संत मार्गदर्शक मंडल के संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी ने संत समाज से एकजुट होकर हिंदू समाज की समस्याओं के निराकरण हेतु कार्य करने का आह्वान किया।

आचार्य शरत चन्द्र ने मतान्तरण (धर्मांतरण) की चुनौती पर जोर देते हुए कहा कि संतों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करना चाहिए। वहीं, स्वामी दिव्यानंद ने कहा कि सनातन का विरोध करने वालों के पूर्वज भी हिंदू ही थे।अखिल भारतीय संत समिति (बिहार) के महामंत्री रणजीतेशानन्द ने हिंदू परिवारों में बच्चों को संस्कार देने की अनिवार्यता पर बल दिया, जबकि आत्मानन्द पुरी महाराज ने आश्रमों में गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित करने का सुझाव दिया। जैन मुनि पद्मराज महाराज ने सिमडेगा के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित बाल संस्कार केंद्रों के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि इससे बच्चों के साथ-साथ उनके परिजनों का भी सांस्कृतिक उत्थान हो रहा है।पटना एवं गुवाहाटी क्षेत्र के संत संपर्क प्रमुख वीरेन्द्र विमल ने स्पष्ट किया कि प्रकृति पूजा हिंदू समाज का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि जो समाज नदियों को माता, पहाड़ों को देवता और वृक्षों की पूजा करता है, वह मूलतः प्रकृतिपूजक ही है। बैठक में शैव, शाक्त, वैष्णव, आर्य समाजी और जैन सहित विभिन्न जनजातीय परंपराओं के संतों ने अपने विचार रखे।बैठक में स्वामी अमृतानंद पुरी, स्वामी केशव दास, स्वामी विजयानन्द दास, स्वामी दिव्य ज्ञान, स्वामी जयराम आनन्दगिरी, सत्यनारायण महाराज, प्रकाश दास गोस्वामी, विभु सुमन, संत उमेशानंद, लक्ष्मी पुरी और आचार्य विद्याबन्धु शास्त्री उपस्थित थे। साथ ही विहिप के क्षेत्र संगठन मंत्री आनन्द कुमार व प्रान्त संगठन मंत्री चित्तरंजन समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। मंच संचालन युगल किशोर ने किया और कार्यक्रम की जानकारी अनिल तिवारी ने दी।

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