‘आदिवासी और क्षेत्रीय सिनेमा पर नया वैश्विक ईकोसिस्टम बने’
रांची में ट्राइबल सिनेमा ऑफ इंडिया का प्रोड्यूसर्स मीट समाप्त हुआ। इसमें फिल्म निर्माताओं और ओटीटी प्रतिनिधियों ने आदिवासी सिनेमा के लिए नए वैश्विक ईकोसिस्टम पर चर्चा की। वक्ताओं ने इसे सस्टेनेबल इंडस्ट्री मॉडल के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भविष्य की रणनीतियों और फिल्म निर्माण पर बारीकियों की चर्चा हुई।

रांची, वरीय संवाददाता। ट्राइबल सिनेमा ऑफ इंडिया का प्रोड्यूसर्स मीट का समापन हुआ। आयोजन बगीईचा नामकुम में हुई। इसमें देशभर के फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों, लेखकों, ओटीटी प्रतिनिधियों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों का एक साझा मंच तैयार किया गया। इसका उद्देश्य आदिवासी और क्षेत्रीय सिनेमा पर नया वैश्विक ईकोसिस्टम तैयार करना है। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी फिल्म निर्माण को केवल कला तक सीमित न रखकर इसे एक सस्टेनेबल इंडस्ट्री मॉडल के रूप में विकसित करना समय की मांग है। चर्चा में ऐसा संगठित ढांचा तैयार करने पर बल दिया गया जो वित्तीय सहायता, पेशेवर उत्पादन, प्रभावी वितरण प्रणालियों के माध्यम से स्वदेशी कहानियों को दुनिया के सामने ला सके।
दूसरे दिन भविष्य की रणनीतियों और फिल्म निर्माण की बारीकियों पर रहा। रामकृष्ण सोरेन, अंकित बागची, साहेब नागपुरिया, निचिता राय जैसे दिग्गजों ने पैनल चर्चा में भाग लिया।
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