रनिया में ‘हॉकी फॉर हर’ से बदल रही बेटियों की तकदीर
खूंटी जिले के रनिया प्रखंड में ‘हॉकी फॉर हर’ कार्यक्रम के तहत आदिवासी बालिकाएं हॉकी खेलकर आत्मविश्वास हासिल कर रही हैं। 100 लड़कियों को नियमित प्रशिक्षण, पौष्टिक आहार और जीवन-कौशल शिक्षा दी जा रही है। यह पहल उनके स्वास्थ्य और शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव डाल रही है, और समुदाय की सहभागिता बढ़ रही है।

रनिया, प्रतिनिधि। खूंटी जिले का रनिया प्रखंड, जो कभी माओवादी और पीएलएफआई गतिविधियों के कारण चर्चा में रहता था, अब सकारात्मक परिवर्तन की मिसाल बन रहा है। जहां कभी भय और बंदूकों की चर्चा होती थी, वहीं अब हॉकी स्टिक की टकराहट और बेटियों की हंसी गूंज रही है। गांवों की आदिवासी बालिकाएं खेल के मैदान में अपनी पहचान बना रही हैं। इस बदलाव के केंद्र में ‘हॉकी फॉर हर’ कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत अगस्त 2025 में जीआरएसई की पहल पर चाइल्ड राइट्स एंड यू (सीआरवाई) के सहयोग से हुई। 14 नवंबर 2025 को बिरसा कॉलेज, खूंटी में इसका औपचारिक शुभारंभ किया गया।
इस पहल के तहत कर्रा और रनिया प्रखंड की 100 आदिवासी बालिकाओं को नियमित हॉकी प्रशिक्षण, पौष्टिक आहार और जीवन-कौशल शिक्षा दी जा रही है। यह क्षेत्र लंबे समय तक संसाधन-विहीन रहा, जहां बड़ी सीएसआर पहलें कम पहुंच पाई थीं। हॉकी से मिला नया आत्मविश्वास: तीन महीने पहले तक अधिकांश बालिकाओं ने कभी हॉकी स्टिक नहीं पकड़ी थी। उनकी दुनिया स्कूल और घरेलू कार्यों तक सीमित थी। अब तस्वीर बदल रही है। 14 वर्षीय महिमा रोज साइकिल से जंगल और छोटी नदी पार कर अभ्यास के लिए पहुंचती हैं। वह बड़े टूर्नामेंट खेलने का सपना देखती हैं। आठवीं की मीरा कहती हैं कि नियमित अभ्यास से उसका आत्मविश्वास बढ़ा है और पढ़ाई में भी सुधार हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि खेल का सकारात्मक असर कक्षा में साफ दिख रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष फोकस: सीआरवाई की रीजनल डायरेक्टर रीना चक्रवर्ती ने बताया कि शुरुआती सर्वे में कई लड़कियों के किशोरावस्था में पढ़ाई छोड़ने, कम उम्र में विवाह के दबाव और लगभग 60 प्रतिशत के एनीमिया से ग्रस्त होने की जानकारी मिली थी। कार्यक्रम के तहत सप्ताह में छह दिन प्रोफेशनल कोचिंग, खेल सामग्री, हीमोग्लोबिन जांच, पोषण सत्र, अभ्यास के बाद गर्म भोजन, जीवन-कौशल प्रशिक्षण और शैक्षणिक सहयोग दिया जा रहा है। समुदाय की बढ़ती भागीदारी: जीआरएसई के चेयरमैन कमोडोर पीआर हरि ने कहा कि एक लड़की को सशक्त बनाना पूरे समाज को सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के अंतर्गत अभिभावकों और ग्राम प्रतिनिधियों से संवाद कर सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। रनिया की बेटियां अब सीमाओं में बंधी नहीं हैं, बल्कि नए सपनों के साथ आगे बढ़ रही हैं।
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