हड़गड़ी पूजा आदिवासी आस्था की पहचान: पवन तिर्की

हड़गड़ी पूजा आदिवासी आस्था की पहचान: पवन तिर्की

संक्षेप:

रांची में शनिवार को कोनका मौजा के मसना स्थल पर परंपरागत हड़गड़ी पूजा श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया और अपने पूर्वजों की स्मृति में प्रार्थना की। पूजा के दौरान चावल एवं उड़द से बने व्यंजनों को कब्रों में अर्पित किया गया।

Dec 13, 2025 06:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची, संवाददाता। कोनका मौजा के मसना स्थल पर शनिवार को परंपरागत हड़गड़ी पूजा श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। पूजा की अगुवाई मौजा के पाहन राजा धाघु किस्पोट्टा और पारनो किस्पोट्टा ने की। शुरुआत पत्थर कुदुवा स्थित हड़गड़ी स्थल पर ढोल-नगाड़ा, धूप-धुवान के साथ पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद ग्रामीण पथ यात्रा करते हुए पुरुलिया रोड स्थित मसना पहुंचे, जहां सभी ने अपने पूर्वजों का स्मरण कर प्रार्थना की। इस दौरान घरों में तैयार चावल एवं उड़द से बने व्यंजनों को पूर्वजों के नाम पर कब्र में अर्पित किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, रांची महानगर के अध्यक्ष पवन तिर्की ने कहा कि हड़गड़ी पूजा आदिवासी समाज में पुरखों और पूर्वजों की स्मृति में सदियों से की जाती रही है।

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उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज पूर्वजों की पूजा करता है, ऐसे में राज्य सरकार को सरना, मसना, अखरा और हड़गड़ी स्थलों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी करानी चाहिए, ताकि इन स्थलों को सुरक्षित रखा जा सके और जमीन दलालों से बचाया जा सके। पूजा कार्यक्रम में 12 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। इनमें डोम टोली, चुटिया, डोमसा टोली, कटहल टोली, टमटम टोली, गढ़ा टोली, पत्थर कुदुवा, चुनवा टोली, नया टोली, बसर टोली और डगरा टोली के ग्रामीण शामिल थे। सभी ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए घर-परिवार में सुख-शांति एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर पाहन धाघु पाहन, पारनो किस्पोट्टा, अनिल किस्पोट्टा, कोनका मौजा अध्यक्ष प्रदीप कुजुर, पवन तिर्की, आकाश तिर्की, निरंजन तिर्की, अनिल कच्छप, सारो सांगा, बिरयानी कच्छप, सुनीता टोप्पो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। मधुकम मौजा में शांतिपूर्ण आयोजन इधर, मधुकम मौजा के सरना धर्मावलंबी आदिवासी समुदाय द्वारा मधुकम मसना स्थल में भी पारंपरिक हड़गड़ी पूजा श्रद्धापूर्वक संपन्न की गई। पूजा में मिलन चौक, महुआ टोली, इरगु टोली, बार कोचा सहित सभी टोलों के ग्रामीणों ने भाग लिया। डुम्बुबुरु जतरा स्थल से पाहन सोमरा तिर्की और धर्म अगुवा दिवा उरांव की अगुवाई में पारंपरिक जुलूस निकाला गया। मसना स्थल पर सरना बिनती के बाद लोगों ने डुम्बू, पुवा, अरवा चावल आदि अर्पित कर पूर्वजों का स्मरण किया। आयोजन शांतिपूर्ण एवं परंपरागत रीति से संपन्न हुआ।