
मकर संक्रांति पर मौजा सिरकाडीह में पारंपरिक फौदी खेल में उमड़ी भीड़
मकर संक्रांति के अवसर पर सिरकाडीह में पारंपरिक फौदी खेल का आयोजन किया गया। गांव के युवाओं और ग्रामीणों ने भाग लिया, जिसमें लकड़ी की गेंदों का उपयोग किया गया। खेल ग्रामप्रधान के घर तक पहुंचते ही समाप्त हुआ, जिसके बाद पारंपरिक स्वागत और भोजन का आयोजन किया गया। यह खेल आपसी भाईचारे का प्रतीक है।
अड़की, प्रतिनिधि। मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार को मौजा सिरकाडीह में आदिकाल से चली आ रही पारंपरिक फौदी खेल का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर गांव के युवाओं और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। फौदी खेल के लिए लकड़ी से बनी 10 से 15 गेंदें तैयार की गईं। गांव के नीचे टोली से लेकर गांव के बीचो-बीच तक दो टीमों के बीच यह खेल खेला गया। खिलाड़ी लकड़ी की गेंद (फौदी) को ठोकते-ठोकते ग्रामप्रधान रोहित कुमार सिंह मुंडा के घर तक पहुंचाते हैं। फौदी ग्रामप्रधान के घर पहुंचते ही खेल का समापन होता है। इसके बाद सभी खिलाड़ियों और ग्रामीणों के पैर धोए गए।
ग्रामप्रधान के परिवार की ओर से सभी का पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया। सभी को इली रासे (रईस बीयर), पूस पीठा और गुड़ पीठा के साथ भोजन कराया गया। भोजन के पश्चात ग्रामप्रधान के आंगन में टुसु नाच-गान का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने उत्साह के साथ भाग लिया। ग्रामीणों के अनुसार फोदी खेल एक प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा है, जिसे विशेष रूप से मकर संक्रांति के अवसर पर खेला जाता है और यह आपसी भाईचारे व एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर प्रो देवनंदन सिंह मुंडा, त्रिवेणी मुंडा, राधानाथ मुंडा, जंगल सिंह मुंडा, शत्रुधन पुराण, लाल लोहरा, महावीर स्वासी, रामधन मिर्धा, जितेंद्र मिर्धा, बाले मुंडा, नितई मुंडा, परेश मुंडा, दिलीप मुंडा, काली मुंडा, जपुद मुंडा, मुकेश, सिबेशर, विजय, राजेन, गोटे पुरना, मधुसूदन खचड़ा, पुराना करम मुंडा, भूपेंद्र मुंडा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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