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18 जनवरी, 2021|6:38|IST

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राज्य के चार हजार वकीलों की प्रैक्टिस पर खतरा

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रांची। प्रमुख संवाददाता

झारखंड के करीब चार हजार वकीलों की प्रैक्टिस खतरे में पड़ गई है। इन वकीलों ने प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराकर बार कौंसिल ऑफ इंडिया को नहीं भेजा है। बार कौंसिल ने सभी को 31 दिसंबर तक सत्यापन कराकर कौंसिल को ऑनलाइन भेजने को कहा था। सभी जिले के बार संघों के माध्यम से भेजना था।

बार कौंसिल ने कहा है कि जिन वकीलों ने सत्यापन नहीं कराया है, उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। वह प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे और कल्याणकारी योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिलेगा। सत्यापन कराने के लिए बार कौंसिल ने कई बार तिथि बढ़ायी। इसके बाद 31 दिसंबर अंतिम तिथि निर्धारित की। राज्य में झारखंड बार कौंसिल से संबद्ध करीब 30 हजार वकील निबंधित हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने बार कौंसिल के वेरिफिकेशन रूल्स 2015 के तहत सभी बार कौंसिल को वकीलों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन को अनिवार्य बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है। इसके बाद बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने राज्य के सभी वकीलों को अपने प्रमाणपत्रों को सत्यापन कराने का निर्देश दिया था। वकीलों को अपने प्रमाणपत्रों के साथ एक फॉर्म भर कर देना था। फिर बार कौंसिल संबंधित विश्वविद्यालय और संस्थानों में प्रमाणपत्रों को जांच के लिए भेजती है। सत्यापन पूरा होने के बाद वकील को कौंसिल के सभी कार्यक्रमों में शामिल होने की छूट मिलती है। साथ ही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ और कौंसिल के चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिलती है।

प्रमाणपत्र गुम और फट जाने की दे रहे दलील

राज्य के अधिकांश वकील इस नियम का विरोध कर रहे हैं। वकीलों का कहना है कि वे 40 साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनका प्रमाणपत्र अब फट गया है। कुछ वकीलों का कहना है कि प्रमाणपत्र गुम हो गया है। इतने साल प्रैक्टिस करने के बाद फिर से प्रमाणपत्र की जांच कराने का निर्णय उचित नहीं है। जिनके पास प्रमाणपत्र नहीं है, उनके लिए संबंधित बार कौंसिल से नियमित प्रैक्टिस का प्रमाणपत्र ही मान्य होना चाहिए।

नियमित प्रैक्टिस करने का भी देना था प्रमाणपत्र

वकीलों को अपने नियमित प्रैक्टिस का भी प्रमाणपत्र देना था। वकीलों को अपने जिला बार संघों से नियमित प्रैक्टिस के प्रमाणपत्र के साथ कोर्ट के कुछ आदेश भी जमा करने को कहा गया था, जिसमें उनके बहस करने का उल्लेख किया गया हो।

फॉर्मेट के अनुसार ही ब्योरा मान्य होंगे

वकीलों को बार कौंसिल ने एक फॉर्मेट भेजा था। वकीलों से नाम, पता, फोन नंबर, व्हाट्सएप नंबर, ईमेल आईडी, इनरोलमेंट नंबर, प्रैक्टिस का स्थान, आवासीय और कार्यालय का पता आदि जानकारी मांगी गई थी। बार कौंसिल के अनुसार वर्तमान परिस्थिति में यदि बीसीआई को वकीलों से सीधे संपर्क करना पड़े तो इसके लिए पूरा ब्योरा रखा जाना जरूरी है। बीसीआई ने सभी जिला और सदस्यों से ईमेल या व्हाट्सएप के माध्यम से आवश्यक सूचनाएं मांगने और उसे जमा कर सीधे बार काउंसिल ऑफ इंडिया को ईमेल के माध्यम से भेजने को कहा था। बार काउंसिल ऑफ इंडिया सूचनाओं को सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के पास भेज देगी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया कोई ऐसा ग्रुप या एप बनाएगी, जिससे वह सीधे तौर पर देश भर के अधिवक्ताओं से संपर्क स्थापित कर सके।

क्यों पड़ी जरूरत

कोरोना संक्रमण के कारण अदालतों की कार्यवाही, लोक अदालत और वैकल्पिक न्याय के सभी माध्यमों से मामलों का निष्पादन अब ऑनलाइन किया जा रहा है। वर्तमान में जारी अस्थायी व्यवस्था को स्थायी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट की ई कमेटी देश के सभी वकीलों का ब्योरा एकत्र कर रही है।

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  • Web Title:Threat on practice of four thousand lawyers of the state