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हाईकोर्ट की टिप्पणी: सड़क पर हजारों लोग मर रहें, सभी तमाशा देख रहे हैं

हाईकोर्ट की टिप्पणी: सड़क पर हजारों लोग मर रहें, सभी तमाशा देख रहे हैं

रांची टाटा एनएच के निर्माण में प्रगति नहीं होने पर मंगलवार को हाईकोर्ट ने सरकार, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, बैंकों और ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई। सरकार की ओर से पेश मौतों का आंकड़ा देखने के बाद जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस बीबी मंगलमूर्ति की अदालत ने कहा कि सरकार अपने ही आंकड़े को गंभीरता से नहीं ले रही है। खराब सड़क के कारण दुर्घटना में एक हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई है।

लेकिन सरकार, एनएचएआई और इस मामले से जुड़े सभी लोग तमाशा देख रहे हैं। किसी को सड़क की चिंता नहीं है। सभी एजेंसिया इस सड़क के साथ सौतेला व्यवहार कर रही हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। कोर्ट ने कहा कि एनएच सड़क निर्माण के लिए स्वतंत्र है। सड़क का निर्माण वह किस एंजेसी से कराएगा यह वही तय करेगी। लेकिन यदि एनएच हाथ खड़ा करता है तो कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करेगी। हम लोगों को मौत के मुंह में नहीं धकेल सकते।

एमडी को कहा - आपको क्यों नहीं जेल भेज दिया जाएसुनवाई के दौरान रांची-टाटा सड़क का निर्माण कर रही कंपनी रांची एक्सप्रेस वे के एमडी भी कोर्ट में मौजूद थे। बैंक, एनएचएआई और राज्य सरकार के अधिकारी भी मौजूद थे। सुनवाई के दौरान सभी अधिकारी अपने वकील के साथ अदालत को सामने खड़े हो गए। लेकिन एमडी पीछे बैठे रहे। कोर्ट ने पूछा कि क्या कंपनी के एमडी ने अपनी संपत्ति का ब्योरा पेश किया है। इस पर बताया गया कि अभी पेश नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने कहा कि एमडी कोर्ट के आदेश से मजाक कर रहे हैं। उन्हें यहीं से जेल भेज दिया जाएगा। कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया और 27 नवंबर तक बताने को कहा कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमाना की प्रक्रिया शुरू की जाए। बैंकों की भूमिका संदेह के घेरे में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बैंकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। कुल 13 बैंकों ने इस कंपनी को लोन दिया है। इस समूह का मुख्य बैंक कैनरा बैंक है।

ऐसा प्रतीत होता है कि बैंकों ने लोन देते समय स्थल का भौतिक सत्यापन नहीं किया। बैंक लोन देते रहे और ब्याज वसूलते जा रहे हैं। सड़क पर काम हो रहा या नहीं हो रहा इससे किसी को कोई मतलब नहीं है। यह जनहित से जुड़ा मामला है इस कारण इसकी जांच कराना आवश्यक है। आवश्यक मामलों की कीमत पर करते हैं सुनवाईकोर्ट ने कहा कि यह जनहित का मामला है। जर्जर सड़क पर मौत हो रही है।

अदालत इस मामले की हर माह सुनवाई कर रही है। दो- दो घंटे सुनवाई हो रही है। सुनवाई कई महत्वपूर्ण मामलों की कीमत पर हो रही है। हम जनहित के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन संबंधित लोग इसके प्रति गंभीर नहीं है। सरकार ने पेश किया मौत का आंकड़ाकोर्ट के आदेश के आलोक में सरकार ने रांची-जमशेदपुर मार्ग पर हुए हादसों का आंकड़ा पेश किया। इसमें रांची और सरायकेला-खरसांवा जिले की अलग- अलग रिपोर्ट पेश की गई।


ब्योरा इस प्रकार है:1.1.11 से 1.1.17 तक का आंकड़ा 808 दुर्घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज की गई रांची जिले में 434 लोगों की मौत हो गई 565 लोग घायल हुए 1088 दुर्घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज हुई सरायकेला-खरसावां में 587 लोगों की मौत हुई 896 लोग घायल हुए।

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  • Web Title:Thousands of people die on the street, watching all the spectacle
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