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पोड़ाहाट वन क्षेत्र में नहीं है एक भी वन ग्राम : अर्जुन बड़ाईक

खूंटी जिले से सटे पश्चिमी सिंहभूम के नक्सल प्रभावित जलासार पंचायत अंतर्गत पोड़ेंगेर गांव में गुरुवार को लगातार हो रही बारिश के बावजूद पोड़ोंगेर,...

पोड़ाहाट वन क्षेत्र में नहीं है एक भी वन ग्राम : अर्जुन बड़ाईक
हिन्दुस्तान टीम,रांचीThu, 07 Dec 2023 09:30 PM
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खूंटी, संवाददाता। खूंटी जिले से सटे पश्चिमी सिंहभूम के नक्सल प्रभावित जलासार पंचायत अंतर्गत पोड़ेंगेर गांव में गुरुवार को लगातार हो रही बारिश के बावजूद पोड़ोंगेर, सुंडिंग, हतनादा, कोमरोड़ा समेत अन्य 15 गांवों के ग्रामप्रधानों व स्थानीय प्रतिनिधियों की बैठक हुई। बैठक का मुख्य मुद्दा शिक्षा, विकास, वन ग्राम व वनाधिकार अधिनियम था। बैठक में मुख्य रूप से सेवानिवृत्त वन प्रमंडल पदाधिकारी अर्जुन बड़ाईक शामिल हुए। उन्होंने ग्रामप्रधानों व प्रतिनिधियों को बताया कि पोड़ाहाट वन क्षेत्र में एक भी वन ग्राम नहीं है।
उन्होंने कहा कि झारखंड में कोल्हान में चार, सारंडा में आठ और पलामू में तीन वनग्राम हैं। उन्होंने बताया कि लगभग सौ-सवा सौ साल पहले जब जंगल से लकड़ी की जरूरत होती थी, तब मजदूर 50-60 किमी से जंगल जाते थे। बाद में उनके लिए जंगलों में ही कैंप बनाया गया। धीरे-धीरे वे वहीं स्थाई रूप से रहने लगे। वही लेबर कैंप बाद में गांव का रूप ले लिया। आजादी के बाद सरकार ने वैसे गांवों का सर्वे कराकर उसे राजस्व गांव घोषित कर दिया।

आज तक गठित नहीं हुआ है ग्राम वनाधिकार समिति:

वनाधिकार कानून के संबंध में जानकारी देते हुए अर्जुन बड़ाईक ने ग्रामीणों को बताया कि 1954 से 1956 के बीच सरकार ने जंगल के अंदर की जमीन का नोटिफिकेशन किया। लेकिन उससे पहले से बहुत से लोग जंगलों में रहते थे और खेती-बारी भी करते थे। अगर उन्हें जंगल से हटा दिया जाता, तो वे कहां जाते। इसी सोच के साथ सरकार ने जंगल में रहने वाले लोगों के लिए वन निवासी अधिकार की मान्यता अधिनियम 2006 बनाया। इसके तहत जंगल में रहने वाले तमाम लोगों को उनके जमीन का पट्टा दिया जा सके। इसके लिए बीडीओ को ग्राम वनाधिकार समिति का गठन कर ग्रामीणों को पट्टा देना है। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि बीडीओ के द्वारा अभी तक किसी भी गांव में ग्राम वनाधिकार समिति का गठन तक नहीं की गई है।

ग्रामीणों ने की पंचायत सचिवालय को शुरू कराने की मांग:

बैठक में शिक्षा व विकास को लेकर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने कहा कि उनके पंचायत क्षेत्र में मोबाइल व इंटरनेट की कनेक्टिविटी नहीं है। वहीं जब इस क्षेत्र में नक्सलवाद का काफी प्रभाव था, तब यहां पंचायत सचिवालय भवन बन रहा था, लेकिन नक्सल कारणों से ही आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन जल्द पंचायत सचिवालय के अधूरे भवन का निर्माण कार्य पूरा कर पंचायत सचिवालय को क्रियाशील करे और मोबाइल व इंटरनेट की सुविधा मुहैया कराए। अन्यथा वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। एतवा बड़ाईक ने कहा कि उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए 30 किमी दूर बंदगांव प्रखंड जाना पड़ता है। जिससे एक व्यक्ति को बंदगांव आने जाने में 120 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। पूर्व उपमुखिया बासू बरजो ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल आदि की समस्या है।

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