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रनिया के बुरूरमंडा गांव में ना बिजली है ना ही पानी और सड़क

डिजिटल इंडिया में यह जानकर आश्चर्य होगा कि पश्चिमी सिंहभूम जिले से सटे खूंटी जिले के अंतिम गांव बुरूरमंडा में आज तक सरकार द्वारा ना तो बिजली...

रनिया के बुरूरमंडा गांव में ना बिजली है ना ही पानी और सड़क
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हिन्दुस्तान टीम,रांचीWed, 19 Jun 2024 01:15 AM
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रनिया, प्रतिनिधि। पश्चिमी सिंहभूम जिले से सटे खूंटी जिले के अंतिम गांव बुरूरमंडा में आज तक सरकार द्वारा ना तो बिजली पहुंचाई गई है, ना ही सड़क और पानी। आज भी इस गांव के लोग आदिम युग में जी रहे हैं। बुरूरमुंडा जिला मुख्यालय से 100 और प्रखंड मुख्यालय से 40 किमी दूर है। जहां 25 आदिवासी परिवार रहते हैं। गांव के सिफ़्रेंन बुढ़, धनेश्वर सिंह, बीरबल सिंह एवं सोमा सुरीन कहते हैं कि गांव तक पहुंच पथ भी ठीक से नहीं है। कलावती देवी, दुबरईत कुमारी एवं अबनेजर बुढ़ बताते हैं कि पूरे गांव के लोग एक छोटा सा डाड़ीनुमा कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं। नहाने-धोने की बात तो छोड़ दीजिए। काफी दिनों पूर्व गड़ा चापाकल ध्वस्त हो गया है।

मुखिया मंजू सुरीन को शिकायत करना अब छोड़ दिये हैं। सरकार तक शिकायत कैसे पहुंचे एवं हमारी दर्द को कौन सुनेगा हम यही सोचते हैं। ग्रामीण दामोदर सिंह, रिस तोपनो, सुखनाथ सिंह, तिलक सिंह, रमेश सिंह कहते हैं कि बिजली नहीं रहने से रात में बच्चों को पढ़ने में काफी दिक्कत होती है। मिट्टी तेल अब मिलना बंद हो गया। बाजार से एक सौ रुपए लीटर खरीदकर या मोमबती से काम चलाना पड़ रहा है। किसी प्रकार की बीमारी होने पर बहुत ही परेशानी होता है। झोलाछाप डॉक्टर ही इस गांव के लोगों के लिए भगवान हैं।

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