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मौत के तार पर झूल रहे राज्य के बिजलीकर्मी 

सिदरौल के पास रामपुर का रहने वाला जुवेल तिग्गा देवकमल ह़ॉस्पिटल में तड़प रहा है। 31 मई को सिदरौल सब स्टेशन को ठीक करते वक्त बिजली की चपेट में आकर वह 80 फीसदी जल चुका है। बिजली वितरण निगम की ओर से हर दिन बिना सेफ्टी किट के मौत से खेलने जाते रहे जुवेल पर बुधवार को बिजली रानी मेहरबान नहीं रह सकी। 
जुवेल को दिन के 11 बजे सिदरौल सब-स्टेशन की गड़बड़ी ठीक करने के लिए भेजा गया। लेकिन उसके हाथों  न ग्लव्स थे और न ही सिर पर हेलमेट था। उसके पास  रबर का सेफ्टी बेल्ट भी नहीं था। यहां तक कि डिस्चार्ज रड के बिना ही वह इस काम को अंजाम दे रहा था। इसी बीच कहीं से बिजली का करंट दौड़ा और वह वहीं तड़पने लगा। साथ काम कर रहे बिजलीकर्मियों ने जब तक उसे बचाया, तब तक शरीर का बहुत कम हिस्सा जलने से बाकी था। 
तीन हजार बिजलीकर्मी बिना सेफ्टी किट के : जुवेल तिग्गा की कहानी तो सिर्फ बानगी भर है। हर बिजलीकर्मी उसकी तरह खुशनसीब नहीं होता है। इनमें से कई भगवान के प्यारे भी हो जाते हैं। हर दिन पूरे झारखंड में तीन हजार से अधिक बिजलीकर्मी बिना किसी सुरक्षा उपायों के बिजली की तारों से खेलते हैं। मरने या घायल होने पर बिजली वितरण निगम इन्हें ठेकेदार का आदमी कह कर पल्ला झाड़ लेता है। हाल के दिनों में सभी एरिया बिजली बोर्डों में दैनिक वेतनभोगी बिजलीकर्मियों का संचालन ठेका कंपनियों के हवाले किया गया है। ये ठेकेदार ग्लव्स, हेलमेट, गंबूट, सेफ्टी बेल्ट और डिस्चार्ज रड जैसी आधारभूत सुविधाएं भी नहीं देते हैं। सच्चाई तो यह है कि ठेकेदारों से आने से पहले बिजली वितरण निगम की ओर से भी इस मामले में लापरवाही बरती जाती थी।
जिम्मेवार दे रहे गैर जिम्मेवारी भरा बयान
टाटीसिलवे विद्युत प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अभय कुमार ने बताया कि जुवेल ठेकेदार का आदमी था। उसे सेफ्टी किट्स दे कर ही भेजा जाना चाहिए था। हमलोग उसे मुआवजा दिलाने की कोशिश करेंगे। रांची एरिया बिजली बोर्ड के महाप्रबंधक धनेश झा ने बताया कि उन्होंने टाटीसिलवे के कार्यपालक अभियंता से रिपोर्ट मांगी है। बिजलीकर्मियों के निजी कंपनियों के हवाले किए जाने के कारण वे इसमें अधिक कुछ नहीं कर सकते हैं। ज्यादा से ज्यादा मुआवजा दिलाने की कोशिश कर सकते हैं। टाटीसिलवे विद्युत प्रमंडल में बिजलीकर्मियों का प्रबंधन देखने वाली निजी कंपनी रानी संस के संचालक रवि सिन्हा का बयान भी बिजली अधिकारियों की तरह ही गैर जिम्मेवारी भरा है। रवि सिन्हा कहते हैं कि बिजली निगम की ओर से पहले से कोई आदेश नहीं होने के कारण बिजलीकर्मियों को ग्लव्स, हेलमेट और गंबूट नहीं दिए जा रहे हैं। अब आदेश मिला है तो इसकी व्यवस्था की जा रही है।
तीन हजार के लिए जान दांव पर 
ग्लव्स, हेलमेट, गंबूट, सेफ्टी बेल्ट और डिस्चार्ज रड के साथ अगर पूरी सेफ्टी किट की बात की जाए तो इन पर लगभग तीन हजार रुपए खर्च होते हैं। लेकिन यह पैसे बचाने के लिए निजी ठेका कंपनियां कर्मचारियों का जान दांव पर लगाती है।
पिछले माह गई पांच की जान 
मई में सूबे के पांच बिजलीकर्मियों की जान बिना सेफ्टी किट के पोल पर चढ़ने के कारण जा चुकी है। इनमें देवघर के हरिनंदन राय की मौत इसी से हुई। बिना सेफ्टी किट के बिजली की तारों के चपेट में आकर जान गंवाने वालों में  गिद्दी के कार्तिक उरांव, जरमुंडी के अजीत यादव व गोड्डा के इकबाल अंसारी तथा चाईबासा के जदुनाथ किस्कू भी इसी कारण मौत को प्राप्त हुए। इसके अलावा गोड्डा के महागामा के संदाम अंसारी, जपला ग्रिड के मनोज राम और आनंद मेहता, गिरिडीह के जहांगीर और बोकारो के संजय महतो उन दुर्भाग्यशाली लोगों में रहे जो बुरी तरह घायल होकर बिस्तर पर पड़े हुए हैं। 

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  • Web Title:The state's electricity workers swinging on the wire