ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News झारखंड रांचीसीडीपीओ व 12 एलएस के पद खाली, नहीं हो रहा सुचारू ढंग से आंगनबाड़ी केंद्रों का प्रर्यवेक्षण

सीडीपीओ व 12 एलएस के पद खाली, नहीं हो रहा सुचारू ढंग से आंगनबाड़ी केंद्रों का प्रर्यवेक्षण

खूंटी जिले में पोषाहार योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का प्रवेक्षण सही ढ़ंग से नहीं हो पा रहा है। इसका प्रमुख कारण...

सीडीपीओ व 12 एलएस के पद खाली, नहीं हो रहा सुचारू ढंग से आंगनबाड़ी केंद्रों का प्रर्यवेक्षण
हिन्दुस्तान टीम,रांचीSun, 23 Jun 2024 01:15 AM
ऐप पर पढ़ें

खूंटी, संवाददाता। खूंटी जिले में पोषाहार योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का प्रर्यवेक्षण सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। इसका प्रमुख कारण जिले में महिला प्रवेक्षिकाओं के साथ दो प्रखंडों अड़की और रनिया में बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों का नहीं होना है। वैसे तो जिले में महिला प्रवेक्षिकाओं के कुल 28 सृजित पद हैं, लेकिन इसके विरूद्ध यहां मात्र 16 प्रवेक्षिकाएं कार्यरत हैं, अन्य 12 पद खाली हैं। ऐसे में 16 प्रवेक्षिकाओं के बल पर जिले के कुल 840 आंगनबाड़ी केंद्रों का प्रवेक्षण संभव नहीं है। खूंटी जिले की भौगोलिक स्थिति भी अनुकूल नहीं है। खासकर मुरहू, अड़की, रनिया और खूंटी सदर प्रखंड के दुर्गम इलाकों में प्रवेक्षिका नहीं पहुंच पातीं हैं। इधर अड़की के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी का प्रभार खूंटी सदर प्रखंड की बीडीओ ज्योति कुमारी को और रनिया का प्रभार वहां के बीडीओ को दिया गया है।

सीडीपीओ और प्रर्यवेक्षिकाओं की कमी के कारण जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का सही ढंग से प्रवेक्षण नहीं हो पाता है। गर्भवती व धातृ महिलाओं समेत तीन से पांच साल के बच्चों को पोषाहार नहीं मिल पाता है। इस कारण खूंटी जिले में गर्भवती महिलाएं स्वयं कुपोषित होने के साथ कुपोषित बच्चों को जन्म दे रही हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2019-21 के अनुसार खूंटी जिले में पांच वर्ष तक के 44 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। बता दें कि खूंटी जिले में कुपोषण बढ़ने का एक और महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि यहां नाबालिग बच्चियों का प्रसव हो रहा है। जिसे रोक पाने में आंगनबाड़ी केंद्र अक्षम साबित हो रहा है। सदर अस्पताल से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन महीनों के अंदर खूंटी के सदर अस्पताल में कुल 73 नाबालिग बच्चियों का प्रसव सदर अस्पताल में कराया गया था। इन सब कारणों से वर्तमान में खूंटी जिले में थैलेसीमिया सिकल सेल के 50 से ज्यादा बच्चे विभिन्न अस्स्पतालों में भर्ती हैं। जिले के सभी कुपोषण उपचार केंद्रों के बेड लगभग फूल हैं।

खूंटी जिले में कुपोषण को लेकर स्थानीय विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा कुछ महीने पहले विधानसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से मामला भी उठाया था। इसके बावजूद सरकार द्वारा कुपोषण को रोकने के सकारात्मक प्रयास नजर नहीं आ रहे। आज भी यहां कुपोषण दूर करने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा आंगनबाड़ी सेविकाओं को पिछले लोकसभा चुनाव में बीएलओ बनाया गया था, जिससे भी आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू ढंग से संचालन में व्यवधान आया था।

बता दें कि गर्भवती और धातृ महिलाओं को सूखा पोषाहार और तीन से पांच साल तक के बच्चों को पका हुआ पोषाहार देने की योजना सरकार द्वारा चलाई जा रही है। लेकिन सीडीपीओ और महिला प्रर्यवेक्षिकाओं के कई पदों के रिक्त रहने के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों के प्रर्यवेक्षण सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। साथ ही इससे समाज कल्याण विभाग की अन्य योजनाएं के क्रियान्वयन में भी प्रभाव पड़ रहा है।

क्या कहतीं हैं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी

रिक्तियों को पूर्ण कर लिया जाए, तो हर आंगनबाड़ी केंद्रों का सही ढंग से प्रर्यवेक्षण हो पाएगा और केंद्रों का संचालन भी सही ढंग से होगा। सरकार की महत्वकांक्षी पोषाहार योजना का लाभ गर्भवती व धातृ महिलाओं के साथ तीन से पांच साल के बच्चों को मिलेगा। मैन पावर की कमी के बावजूद विभाग योजनाओं का लाभ हर पात्रता रखने वालों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

: सुमन सिंह, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, खूंटी।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
Advertisement