DA Image
22 सितम्बर, 2020|10:15|IST

अगली स्टोरी

पितरों के तर्पण का पितृ पक्ष आज से 17, सितंबर को सर्वपैतृ अमावस्या पर होगा समापन

पितरों के तर्पण का पितृ पक्ष आज से 17, सितंबर को सर्वपैतृ अमावस्या पर होगा समापन

सनातनी समाज के पितरों के तर्पण का प्रतिपदा पितृ पक्ष बुधवार से आरंभ होगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से आरंभ होने वाला पितृ पक्ष अश्विन मास की अमावस्या तक रहेगा। बुधवार से 17 सितम्बर तक देहवासन की तिथि के मुताबिक परिवार वाले अपने दिवंगत सदस्य और पितरों का तर्पण करेंगे।

धर्मशास्त्र के मुताबिक जल में मिले काला तिल, जौ और सफेद फूल अर्पण करने के साथ ही लोग पितरों के लिए भोजन भी अर्पित कर आशीष लेते हैं। कई परिवार में क्षोर मुंडन के साथ दोपहर में जल में खड़े होकर को तर्पण करने की परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। जिनको पितरों के देहावसन की तिथि मालूम नहीं है, वह पखवाड़े के अंत में सर्वपितृ तिथि पर तर्पण करेंगे। राजधानी में विभिन्न इलाके में स्थित तालाब, डैम और कई नदी तट पर लोग पितृ पक्ष पर तर्पण करेंगे। वहीं लॉकडाउन में पार्क की वजह से प्रवेश द्वार बंद होने के कारण हटनिया तालाब और गोंदा डैम में लोग तर्पण नहीं कर सकेंगे।

दान-पुण्य का है महत्व :

पितृ पक्ष में दान और पुण्य का महात्म्य है। एक पखवाड़े में पितृ दोष निवारण और ऋण भार से मुक्ति के लिए कई तरह के अनुष्ठान होंगे। ज्योतिषाचार्य आचार्य श्रीकृष्ण ने बताया कि मान्यता है कि इस दौरान गो सेवा, उनके लिए चारा, पक्षियों के लिए दाना, श्वान और काग को भोजन समेत वृषभ सेवा से पितृ दोष से निवारण होता है। तर्पण के बाद घरों में श्रीमदभागवत गीता और गजेंद्र मोक्ष के पाठ को पुण्यकारी बताया गया है। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने और सामर्थ्य के मुताबिक दान देकर विदा करने को फलदायी बताया गया है।

कोट : इस बार पितृ पक्ष में सात सर्वार्थ सिद्धि योग, पांच सिद्धि और सात अमृत योग है। 13 सितंबर को शनि पुष्य योग है। इसके अलावा गुरु, शनि, सूर्य और मंगल अपने स्वगृही स्थान पर रहेंगे।

-आचार्य पीके युग, ज्योतिषाचार्य

भगवान श्री विष्णु की पूजाकर अनंत सूत्र धारण किया :

अनंत चतुर्दशी पर मंगलवार को राजधानी में सनातनी समाज के लोगों ने भगवान श्री विष्णु की पूजा की। पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने अनंत सूत्र धारण किया। लॉकडाउन की वजह से मंदिरों में इस मौके पर होने वाले सामूहिक अनुष्ठान नहीं हुए। लोगों ने परिवार के सदस्यों के साथ घर पर ही स्नान-ध्यान के बाद व्रत धारण किया और पूजा में भागीदारी निभायी। पूजा के बाद सुख-समृद्धि की कामना के साथ आरती हुई। इसके बाद प्रसाद का वितरण हुआ। रातू रोड स्थित श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर, सेवा सदन पथ में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर समेत अन्य मंदिरों में अर्चक पुजारी पूजा के साथ विशेष अनुष्ठान किया।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:The paternal side of the ancestors 39 sacrifice from today September 17 will end on the all-pious Amavasya