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अस्पताल में लगातार बढ़ रही है लू से पीड़ित मरीजों की संख्या

जिले में लगातार लू के चपेट में आए मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। सोमवार को नौ और मंगलवार को छह लू से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचे। मार्च से अब तक कुल...

अस्पताल में लगातार बढ़ रही है लू से पीड़ित मरीजों की संख्या
हिन्दुस्तान टीम,रांचीWed, 22 May 2024 02:15 AM
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खूंटी, संवाददाता।
जिले में लगातार लू के चपेट में आए मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। सोमवार को नौ और मंगलवार को छह लू से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचे। मार्च से अब तक कुल 135 लू के मरीजों का इलाज सदर अस्पताल में किया जा चुका है। प्रखंड मुख्यालयों के अस्पतालों में औसतन 35-40 लू के मरीजों का इलाज किया गया है। लू के अलावा अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या भी अस्पताल में लगातार बढ़ती जा रही है। सोमवार को सदर अस्पताल के ओटी व एमरजेंसी में 409 और मंगलवार को ओपीडी में 332 मरीज इलाज कराने सदर अस्पताल पहुंचे। प्रखंडों के सीएचसी में औसतन 80 से 100 सामान्य मरीज हर दिन अस्पताल पहुंच रहे हैं।

इस संबंध में सिविल सर्जन ने कहा कि बढ़ते तापमान के कारण मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। लू पीड़ित मरीजों के संबंध में उन्होंने कहा कि भरपेट खाना नहीं खाने और बिना पानी पीये घर से निकलने के कारण लोग लू के चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने सलाह दी है कि लोगों को अनावश्यक घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अगर जरूरत पड़े तो भपेट खाना खाकर व पानी पीकर ही घर से बाहर निकलना चाहिए। साथ ही पूरे बदन को ढ़ंककर रखना चाहिए। बाइक सवार लोगों को हेलमेट पहनकर और शरीर को ढ़ंककर वाहन चलाने की सलाह उन्होंने दी है। साथ ही बीच-बीच में पानी पीते रहने की सलाह भी दी। सीएस ने कहा कि अगर लू के लक्षण का पता चले, तो तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल जाकर चिकित्सकों से संपर्क करें। अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस पावडर हैं, इसके लिए ओआरएस कॉर्नर भी खोले गए हैं। इसके साथ ही प्रचुर मात्रा में दवाएं सभी अस्पतालों में उपलब्ध हैं।

अफीम की खेती के कारण घट रही है आदिवासियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता

इस संबंध में पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी मिली है कि अस्पतालों में ग्रामीण इलाकों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पहले आदिवासी पूरे धूप में काम करने के बाद भी स्वस्थ रहते थे, आदिवासियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी होती है। लेकिन इधर अफीम की खेती के बाद देखा जा रहा है गांवों में बीमार पड़ने वाले आदिवासियों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अफीम की खेती के कारण आदिवासियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता लगातार घट रही है, जो भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। इसे लेकर समाज के लोगों को चिंतन करना चाहिए।

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