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झूलन अनुष्ठान के साथ बिकुवादाग गांव का ऐतिहासिक मंडा पर्व संपन्न

बिकुवादाग गांव में शुक्रवार को ऐतिहासिक चार दिवसीय मंडा अनुष्ठान पूरे भक्तिभाव और श्रद्धा विश्वास के साथ संपन्न हो गया। इस बार 178 भोक्ताओं ने...

झूलन अनुष्ठान के साथ बिकुवादाग गांव का ऐतिहासिक मंडा पर्व संपन्न
हिन्दुस्तान टीम,रांचीSat, 25 May 2024 01:15 AM
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तोरपा, कर्रा, हिटी। बिकुवादाग गांव में शुक्रवार को ऐतिहासिक चार दिवसीय मंडा अनुष्ठान पूरे भक्तिभाव और श्रद्धा विश्वास के साथ संपन्न हो गया। इस बार 178 भोक्ताओं ने अनुष्ठान में भाग लिया। सुबह से लेकर शाम तक निराहार रहकर और दहकते अंगारों में नंगे पाव चलकर भगवान भोलेनाथ की भक्ति का परिचय देते हुए 20 फीट ऊंचे झूले में झूलकर मंडा पूजा का समापन हुआ। मंडा पूजा के अंतिम दिन शिवालय परिसर में भक्तों और श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसके पूर्व गुरुवार की रात धुंआसी, फूलखुंदी आदि अनुष्ठान संपन्न किये गये। फूलखंदी के तहत शिवभक्तों ने नंगे पाव दहकते अंगारों के बीच चलकर अपनी भक्ति और आस्था का परिचय दिया। वहीं झूलन के दौरान झूलते हुए शिवभक्तों ने श्रद्धालुओं के बीच आस्था के फूल बरसाए, जिसे पाने की होड़ महिला-पुरुषों के बीच मची रही।

तीन सौ साल से भी पुराना इतिहास है बिकुवादाग मंडा का:

वैसे तो कोई यह नहीं बता सकता कि बिकुवादाग मंडा की शुरुआत कब हुई, पर क्षेत्र के अधिकतर लोग मानते हैं कि यहां के मंडा का इतिहास तीन सौ साल से पुराना है। मंडा पूजा की देखरेख करने वाले पुराने जमींदार परिवार के दिलीप शर्मा, सच्चिदानंद शर्मा और अश्विनी शर्मा बताते हैं कि संभवतः बिकुवादाग का मंडा इस क्षेत्र का सबसे पुराना शिव भक्ति का सबसे प्राचीन अनुष्ठान है।

नन्हें शिवभक्त भी घर छोड़ निराहार रहकर करते है अनुष्ठान:

बिकुवादाग मंडा में न सिर्फ बड़े बल्कि छोटे-छोटे बच्चे भी चार दिनों तक घर छोड़कर और निराहार रहकर भावान भोलेनाथ की आराधना करते हैं। निधिया गांव के रंजीत महतो जो पिछले 60 वर्षों से लगातार भोक्ता बनकर मंडा अनुष्ठान करते हैं। इस बार उनके दो नन्हें पोते छह वर्षीय अभिनय महतो और आठ वर्षीय अंश महतो ने भी मंडा के सभी अनष्ठान पूरे किये। दो बच्चों के साथ अन्य बच्चों ने भी दहकते अंगारों में नंगे पांव चलकर और 20 फीट की ऊंचाई पर झूलकर कर अपनी निष्ठा और विश्वास का परिचय दिया।

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