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विस्तारित मन ही बैकुंठ है: विश्वदेवानंद अवधूत

पुरुलिया के बागलता आनंदनगर में शुक्रवार को आनंदमार्ग प्रचारक संघ का तीन दिनी धर्म महासम्मेलन आरंभ हुआ। ब्रह्म मुर्हूत में बाबानाम केवलम कीर्तन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। संघ से जुडे साधकों ने गाजे-बाजे के साथ प्रभात फेरी निकाली। सभी अष्टाक्षरी महामंत्र का गायन कर रहे थे। आचार्य सत्यदेवानंद अवधूत ने आध्यात्मिक उन्नति के लिए धर्म चक्र में प्रभात संगीत प्रस्तुत किया। पुरोधा प्रमुख की मौजूदगी में कौशिकी एवं तांडव नृत्य हुआ। शाम में पुरोधा बोर्ड, आचार्य बोर्ड एवं तात्विक बोर्ड की बैठक हुई। विस्तारित मन ही बैकुंठ है: विश्वदेवानंद अवधूत आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख विश्वदेवानंद अवधूत ने कहा की विस्तारित मन ही बैकुंठ है। मन के संकुचित अवस्था में आत्मा का विस्तार संभव नहीं है। संकुचित अवस्था को हटा दिया जाए, या दूर कर दिया जाए ,तो मन में स्वर्ग की स्थापना हो जाती है। इसलिए बाबा कहते हैं विस्तारित हृदय ही वैकुंठ है। उन्होंने कहा कि भक्त कहता है कि मैं हूं और मेरे परम पुरुष हैं दोनों के बीच में कोई और तीसरी सत्ता नहीं है। मैं किसी तीसरी सत्ता को मानता ही नहीं हूं। इस भाव में मनुष्य प्रतिष्ठित होता है तो उसी को कहेंगे ईश्वर प्रेम में प्रतिष्ठा, भगवत प्रेम में प्रतिष्ठा हो गई। यही है भक्ति की चरम अवस्था। चरम अवस्था में भक्त के मन से जितने भी ईष्र्या, द्वेष, घृणा , भय, लज्जा , शर्म ,मान मर्यादा, यश -अपयश इत्यादि के भाव समाप्त हो जाते हैं। इनकी रही भागीदारीधर्म महासम्मेलन के उद्घाटन में आचार्य सत्याश्रयानंद अवधूत, आचार्य रागानुगानंद अवधूत, अवधूतिका आनंद दयोतना आचार्या, आचार्य सत्याश्रयानंद अवधूत, रतन महतो तात्विक समेत अन्य की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

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  • Web Title:The expanded mind is the only bhukunda: Vishvedevandan Avadhut