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25 अक्तूबर, 2020|1:39|IST

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समाज में परिवर्तन की नकारात्मकता को वंचित वर्ग झेल रहा है- डॉ रणविजय राव

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सेंट जेवियर्स कॉलेज के हिन्दी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार की शुरुआत मंगलवार को हुई। इसका विषय था- जीवनमूल्यों का संदर्भ और साहित्य: अतीत से आज तक। मुख्य वक्ता थे लोकसभा के हिन्दी संपादक डॉ रणविजय राव।

डॉ राव ने भूमंडलीकरण का समाज, भाषा, साहित्य और संस्कृत पर प्रभाव, की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भूमंडलीकरण के युग में भारतीय संस्कृति, समाज और भाषा में बड़ी तेजी से परिवर्तन हो रहा है। परिवर्तन की इस रफ्तार के साथ आबादी के सक्षम लोगों का एक छोटा-सा हिस्सा ही चल पा रहा है। जबकि, वंचित वर्ग, गरीबों, किसानों और मजदूरों की बड़ी आबादी इस परिवर्तन की नकारात्मकता को झेल रही है।

उन्होंने कहा कि भूमंडलीय चेतना का सही दिशा में विकास तभी संभव हो पाता, जब भारतीय संस्कृति आचार-विचार पर आधारित सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन होता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भूमंडलीकरण ने तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराईं, लेकिन दुविधाएं भी बहुत बढ़ाईं।

दूसरे सत्र में बतौर मुख्य वक्ता छत्तीसगढ़ साहित्कार डॉ गिरीश पंकज मौजूद थे। उन्होंने- अतीत और वर्तमान का परिप्रेक्ष्य और साहित्य, विषय पर चर्चा की। कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। लेकिन सिर्फ सच परोसना साहित्य का मकसद नहीं। सत्यम, शिवम, सुंदरम की भावना साहित्य में पोषित होती है। साहित्य सिर्फ आज की बात नहीं करता, बल्कि कल का पथ भी प्रशस्त करता है।

परिचर्चा के दौरान कॉलेज प्राचार्य डॉ इमानुएल बारला, हिन्दी विभागाध्यक्ष सह बेबीनार के संयोजक डॉ कमल कुमार बोस, डॉ जय प्रकाश पांडेय, डॉ सुनील भाटिया, डॉ मेल्टीना टोप्पो, डॉ संजय कुमार, मनीष मिश्रा समेत बड़ी संख्या में अन्य प्रतिभागी मौजूद थे।

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  • Web Title:The disadvantaged class is facing the negativity of change in society - Dr Rannvijay Rao