DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   झारखंड  ›  रांची  ›  सूबे में प्रधानमंत्री आवास योजना की हालत खराब
रांची

सूबे में प्रधानमंत्री आवास योजना की हालत खराब

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Sat, 04 Jul 2020 11:11 PM
सूबे में प्रधानमंत्री आवास योजना की हालत खराब

राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की स्थिति दयनीय है। पिछले छह महीने में केवल 24 हजार आवास स्वीकृत हो पाए हैं। इनमें केवल 3700 लोगों को आवास के लिए पहली किस्त जारी हो पायी है। जबकि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 2.16 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

66 हजार आवेदन मिलेः

राज्य में चालू वित्तीय वर्ष में 2,12,196 आवास निर्माण का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य का केवल 31 फीसदी पंजीकरण हो पाया है। यानी 66,856 आवास के लिए पंजीकरण हुआ है। वहीं केवल 11 फीसदी यानी 22,774 आवासों को एक जुलाई तक स्वीकृति मिली है। इन 22,774 लोगों का सत्यापन भी हो गया है और बैंक एकाउंट भी सत्यापित कर लिया गया है। सरकार द्वारा आवास निर्माण के लिए 1.30 लाख रुपये दिए जाते हैं। यह राशि तीन किस्त में लाभुक के खाते में जाता है। पहली किस्त मकान शुरू करने के लिए और इसके बाद के दो किस्त मकान निर्माण के साथ-साथ मिलता है।

सबसे अधिक लक्ष्य साहिबगंज कोः

राज्य में 24 जिलों के ग्रामीण क्षेत्र में आवास निर्माण के लिए लाभुक का चयन करना है। राज्य स्तर पर जिलों को लक्ष्य दिया गया है। सबसे अधिक आवास पाकुड़ में 17,555 का निर्माण होना है। इसके बाद साहिबगंज में 15,531, दुमका में 16,431 और गढ़वा में 14,900 आवास का निर्माण होना है।

आधे जिलों में पहली किस्त भी नहीं गईः

राज्य के आधे जिले ऐसे हैं, जहां एक जुलाई तक एक भी लाभुक को पहली किस्त भी नहीं मिली थी। हालांकि इऩ जिलों में स्वीकृति और बैंक का सत्यापन हो चुका है। बोकारो, धनबाद, गढ़वा, गोड्डा, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, खूंटी, सिमडेगा व प. सिंहभूम में एक भी लाभुक को पहली किस्त नहीं दी गई है। वहीं सबसे अधिक पू. सिंहभूम में 838 लाभुकों को पहली किस्त मिल गई है। जबकि लोहरदगा में 675, पाकुड़ में 493 और दुमका में 460 लाभुकों को पहली किस्त मिल पायी है।

लॉकडाउन के कारण लटका था मामलाः

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय वर्ष अप्रैल से शुरू हुआ है। मार्च के अंतिम सप्ताह तक कोरोना संकट की वजह से लॉकडाउन लग गया था। इस वजह से आवास निर्माण के काम में बाधा आई। अप्रैल में लगभग कोई काम नहीं हो पाया। पिछले दो महीने से थोड़ा-थोड़ा काम हुआ है। इसके बाद से जिलों में काम शुरू हुआ है। लाभुकों का चयन करना जिलों की जिम्मेदारी है। पिछले दिनों विभागीय सचिव आराधना पटनायक ने समीक्षा के क्रम में जिलों को तेजी से लाभुकों के चयन और राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। धीरे-धीरे इस में गति पकड़ने की उम्मीद है।

संबंधित खबरें