
सभी कार्यों के पीछे ईश्वर ही सच्चे कर्ता हैं: स्वामी ईश्वरानंद
रांची में योगदा सत्संग सोसाइटी के स्वामी ईश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि ध्यान के माध्यम से चेतना को ईश्वर से जोड़ा जा सकता है। गीता जयंती पर उन्होंने निष्काम कर्म और मानवता की सेवा का महत्व समझाया। स्वामी ने योग के सही दृष्टिकोण और आंतरिक संतुलन पर जोर दिया।
रांची, प्रमुख संवाददाता। योगदा सत्संग सोसाइटी के वरिष्ठ सन्यासी स्वामी ईश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि ध्यान के जरिए चेतना को ईश्वर से जोड़ा जा सकता है। ऐसे लोग विभिन्न माध्यमों से लोकोपकारी कार्य संपन्न कर स्वयं को निष्काम कर्म से जोड़ने में सफल होते हैं। स्वयं को ईश्वर से जोड़ना श्रेष्ठ कर्म है। सभी कार्यों के पीछे ईश्वर ही सच्चे कर्ता हैं। स्वामी ईश्वरानंद रविवार को चुटिया के योगदा मठ में श्रीमद्भागवत गीता के प्राकट्य वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में प्रवचन कर रहे थे। गीता जयंती पर आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मानव जीवन में आलस्य तथा अकर्मण्यता किसी भी प्रकार से ठीक नहीं है।
ईश्वर ने मृत्युलोक को दुख, कष्ट सहने के लिए नहीं बनाया है। जीवन को उमंग की आवश्यकता है, उसे उम्मीद की जरूरत नहीं है। संसार में जो भी व्यक्ति मानवता की सेवा के भाव से कोई काम करते हैं आगे वही निष्काम कर्म बन जाता है। श्रीमद्भागवत गीता मानवता को धार्मिक कार्य, आंतरिक संतुलन और आध्यात्मिक अनुभूति की ओर मार्गदर्शन करता है। निष्काम कर्म आत्मा की मुक्ति का मार्ग विषय पर प्रवचन करते हुए उन्होंने अध्याय दो के श्लोक 47 से 51 तक की व्याख्या की। उन्होंने समझाया कि कैसे गीता जीवन के कर्तव्यों में पूरी तरह से संलग्न रहने के साथ परिणामों के प्रति आंतरिक रूप से अनासक्त रहने की शिक्षा देती है। परमहंस योगानंद के गहन विचार को स्पष्ट करते हुए उन्होंने ने इस बात पर जोर दिया कि योगी ऊर्जावान, निःस्वार्थ भाव और आंतरिक संतुलन के साथ काम करना सीखता है। उन्होंने योगानन्द महाराज द्वारा योग की परिभाषा उचित कर्म करने की कला के रूप में बताई, और स्पष्ट किया कि कैसे सही दृष्टिकोण, भक्ति और आंतरिक समर्पण कर्म को आध्यात्मिक मुक्ति के मार्ग में परिवर्तित कर देते हैं। प्रवचन में श्रीश्री परमहंस योगानन्द के भक्त, योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया के संस्थापक एवं विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक क्लासिक योगी कथामृत के लेखक के साथ कई अन्य आध्यात्मिक साधकों शामिल हुए। वहीं, बड़ी संख्या में साधकों ने व्यक्तिगत रूप से और हजारों लोगों ने वाईएसएस यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

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