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डीएवी खलारी में स्वामी दयानंद सरस्वती का 200वां जन्मोत्सव मनाया गया

डीएवी स्कूल खलारी में सोमवार को महान समाज सुधारक, सत्यार्थ प्रकाश के प्रणेता एवं आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का 200वां जन्म उत्सव...

डीएवी खलारी में स्वामी दयानंद सरस्वती का 200वां जन्मोत्सव मनाया गया
हिन्दुस्तान टीम,रांचीMon, 12 Feb 2024 05:30 PM
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खलारी, संवाददाता। डीएवी स्कूल खलारी में सोमवार को महान समाज सुधारक, सत्यार्थ प्रकाश के प्रणेता एवं आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का 200वां जन्म उत्सव बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ कमलेश कुमार ने सभी वरिष्ठ शिक्षकों के साथ संयुक्तरूप से स्वामी दयानंद सरस्वती  के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित करके समारोह की शुरुआत की। सभी छात्रों और शिक्षकों ने पुष्पांजलि देकर स्वामी दयानंद सरस्वती के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की। इसके साथ ही एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। तदोपरांत एसीसी कॉलोनी में विद्यालय के बच्चों और शिक्षकों के द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभात फेरी में बच्चों का जोश और जुनून देखते ही बन रहा था। वे सभी महर्षि दयानंद अमर रहे, अमर रहे और दयानंद सरस्वती जी के जयकारों के साथ गगन भेदी नारे लगा रहे थे।

12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए आशीर्वाद समारोह का आयोजन:

विद्यालय में सोमवार को 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए आशीर्वाद समारोह का भी आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत वैदिक हवन यज्ञ से की गई। इस अवसर पर विशेष रूप से आमंत्रित बच्चों के अभिभावकों को भी हवन में शामिल किया गया। हवन के बाद सभी वरिष्ठ शिक्षकों के द्वारा बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वचन कहे गए।  विद्यार्थियों पर सभी उपस्थित अभिभावकों, शिक्षकों और प्राचार्य ने पुष्प बरसाकर अपना आशीर्वाद दिया। साथ में विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए भेंट स्वरूप कलम दी गई और प्रसाद का वितरण किया गया। उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षकों ने बच्चों को वार्षिक परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन के लिए सभी जरूरी टिप्स दिए।  विद्यालय के प्राचार्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यालय हमेशा बच्चों के भविष्य के बारे में सजगता और ईमानदारी से उनकी भलाई के बारे में प्रयासरत रहेगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसे काम करने चाहिए, जिन पर उनके माता-पिता, विद्यालय एवं समाज गौरवांवित महसूस करें।

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