अमन श्रीवास्तव समेत 19 पर यूएपीए का मुकदमा चलाने का आदेश रद्द

Jan 10, 2026 07:14 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार के गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और 19 अन्य पर यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन स्वीकृति गंभीर कानूनी प्रक्रिया है और बिना ठोस साक्ष्यों के दी गई अनुमति अवैध है। हाईकोर्ट का यह कहना कि स्वीकृति की वैधता ट्रायल के बाद देखी जाएगी, गलत है।

अमन श्रीवास्तव समेत 19 पर यूएपीए का मुकदमा चलाने का आदेश रद्द

रांची, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव, उसके परिजन समेत 19 पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाने की अनुमित के झारखंड सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि अभियोजन की स्वीकृति कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि एक गंभीर और पवित्र कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें सक्षम प्राधिकारी को स्वतंत्र रूप से सोच-विचार कर निर्णय लेना होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों पर आईपीसी और बीएनएस के तहत मुकदमा जारी रहेगा। मामला एटीएस के केस से जुड़ा है। इसमें अमन गैंग के गुर्गे रंगदारी वसूलने, आतंक फैलाने और हवाला के जरिए अवैध पैसों का लेन-देन कर रहे थे।

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इसमें एटीएस ने इन पर यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। इस मामले में सरकार ने दो बार यह कहते हुए यूएपीए के तहत अभियोजन की स्वीकृति देने से इनकार कर दिया था कि इसके तहत अभियोजन की स्वीकृति देने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं है। सरकार के पास जब तीसरी बार अभियोजन का प्रस्ताव गया तो बिना किसी नए या ठोस अतिरिक्त साक्ष्य के तीन अक्तूबर 2023 को तीसरी अभियोजन स्वीकृति दे दी। इसके खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में आरोपियों ने याचिका दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने किसी प्रकार की अंतरिम रोक नहीं लगायी। शीर्ष कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब दो बार अभियोजन स्वीकृति अस्वीकार हो चुकी थी तो तीसरी बार अनुमति देने के लिए ठोस और नए साक्ष्यों का होना जरूरी था, जो पूरी तरह नदारद थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का यह कहना कि स्वीकृति की वैधता ट्रायल के बाद देखी जाएगी, कानूनन गलत है। यदि अभियोजन की नींव ही अवैध है तो किसी भी आरोपी को लंबे और कठिन मुकदमे से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। विनोद पांडेय एवं अन्य ने की थी अपील फैसला विनोद पांडेय एवं अन्य द्वारा दायर अपील याचिका पर सुनाया गया। पांडेय पर आरोप था कि वह अमन गैंग का सदस्य है और रंगदारी व आतंक फैलाने की गतिविधियों में शामिल रहा है। छापेमारी में पांडेय के पास से 5.42 लाख रुपये और सह-आरोपी सिद्धार्थ साहू के पास से 28.55 लाख रुपये मिले थे। इसमें अमन समेत 19 लोगों पर यूएपीए के तहत केस दर्ज किया हुआ था।

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