पड़हा व्यवस्था हमारी धरोहर है : नीलमणी भगत

हिन्दुस्तान, रांची
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बेड़ो प्रखंड के बारीडीह गांव में तीन दिवसीय पड़हा जतरा के दूसरे दिन कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें पारंपरिक पड़हा व्यवस्था की चर्चा हुई, जो सामाजिक न्याय और आदिवासी पहचान को मजबूत करती है। वक्ताओं ने इस व्यवस्था के ऐतिहासिक महत्व और ग्रामीण विवाद निपटारे में उपयोगिता पर जोर दिया।

पड़हा व्यवस्था हमारी धरोहर है : नीलमणी भगत

बेड़ो, प्रतिनिधि। बेड़ो प्रखंड के बारीडीह गांव स्थित पड़हा जतरा मैदान में तीन दिवसीय पड़हा जतरा के दूसरे दिन कार्यशाला और विचार गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें पारंपरिक पड़हा व्यवस्था को मजबूत करने और उसके महत्व पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न गांवों के पड़हा राजा, दीवान, कोटवार और ग्रामीण शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि पड़हा व्यवस्था सदियों पुरानी स्वशासन प्रणाली है, जो सामाजिक न्याय, भाईचारा और आदिवासी पहचान को मजबूत करती है। संरक्षक डॉ दिवाकर मिंज ने कहा कि पड़हा व्यवस्था का ऐतिहासिक महत्व है और यह आज भी ग्रामीण स्तर पर विवाद निपटारे में उपयोगी है। भौआ उरांव ने जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई।

कार्यकारी अध्यक्ष जुगेश उरांव ने कहा कि यह व्यवस्था सामाजिक समरसता का आधार है और इसमें युवाओं की भागीदारी जरूरी है। मुख्य संरक्षक नीलमणी भगत ने कहा कि पड़हा व्यवस्था हमारी धरोहर है और इसे बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और पड़हा समाज के लोग मौजूद थे।

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