
भारतीय जीवनशैली ही भविष्य का मार्ग: प्रकाश सहाय
रांची विश्वविद्यालय के यूजीसी मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ। शिक्षाविद प्रकाश सहाय ने 'भारतीय जीवनशैली: लाख दुखों की एक दवा' विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने शिक्षा के महत्व, भारतीय संस्कृति में स्त्री की भूमिका और झारखंड के विकास पर चर्चा की।
रांची, विशेष संवाददाता। यूजीसी मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी), रांची विश्वविद्यालय में संचालित-सामाजिक विज्ञान में अंतर/बहुविषयक रिफ्रेशर कोर्स के तहत बुधवार को एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता शिक्षाविद प्रकाश सहाय ने ‘भारतीय जीवनशैली: लाख दुखों की एक दवा (आईकेएस के संदर्भ में)’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 60 शिक्षक-प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अपने संबोधन में प्रो. सहाय ने कहा कि शिक्षा तभी प्रभावी होती है जब उसमें मौलिकता, अनुभव और संवेदना का समावेश हो। उन्होंने आधुनिक रटंत शिक्षा प्रणाली की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल सूचनाएं देना नहीं, बल्कि सीखने की जिज्ञासा और तर्क क्षमता विकसित करना है।
रामराज्य की अवधारणा को नैतिक शासन से जोड़ते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि एक आदर्श समाज का निर्माण केवल त्याग, कर्तव्य बोध और निस्वार्थ नेतृत्व से ही संभव है। प्रो. सहाय ने सामाजिक और सांस्कृतिक गिरावट को आर्थिक भ्रष्टाचार से कहीं अधिक घातक बताया। उन्होंने भारतीय संस्कृति में स्त्री की भूमिका को प्रेम, संस्कार और सामाजिक एकता का आधार स्तंभ बताया। झारखंड के विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने स्थानीय संसाधनों के वैज्ञानिक और बेहतर उपयोग पर बल दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वेद, आयुर्वेद और वैदिक गणित भारतीय वैज्ञानिक चेतना के सशक्त प्रमाण हैं। रामायण के आदर्शों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन-शैली केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य का मार्ग है।

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