शोध मानवता की सेवा पर केंद्रित होने चाहिए: कुलपति
रांची विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग में 2025 में केमिस्ट्री के नोबल पुरस्कार और मेटल आर्गेनिक फ्रेमवर्क्स पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कुलपति डॉ धर्मेंद्र कुमार सिंह ने हरित ऊर्जा और शोध के महत्व पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने सौर ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी विकास पर चर्चा की।

रांची, विशेष संवाददाता। रांची विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग में शुक्रवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विषय था- वर्ष 2025 में केमिस्ट्री का नोबल पुरस्कार, मेटल आर्गेनिक फ्रेमवर्क्स। इसकी शुरुआत करते हुए कुलपति डॉ धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड अपने खनिजों, खदानों और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है। हमें यहां हरित ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें शोध और अनुसंधान के लिए ज्ञान के साथ दूरदर्शी सोच की आवश्यकता है। हमारे शोध मानवता की सेवा लिए होने चाहिए, तभी हमारा देश आगे बढेगा। मुख्य वक्ता सीएमपीडीआई के जीएम पर्यावरण डॉ वीके पांडेय ने कहा कि हमें सौर उर्जा के क्षेत्र में कार्य करना होगा, हम चीन जैसे देशों से अपनी तुलना नहीं करना चाहेंगे।
चीन की आवश्यकता हमसे बहुत ज्यादा है। हमें जलवायु परिवर्तन को देखते हुए समन्वय से कार्य करना होगा और कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाना होगा। साथ ही इसके लिए सामाजिक जुड़ाव भी जरूरी है। दूसरे वक्ता सीयूजे के प्राध्यापक डॉ समदर्शी ने ग्रीन एनर्जी के उत्पादन और उपयोग की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें इसके लिए एमोयू करने से लेकर अनुसंधान पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने स्लाइड शो के माध्यम से सौर ऊर्जा में अनुसंधान को विस्तार से बताया। वहीं, बीआईटी, मेसरा की प्राध्यापक प्रो सुमित मिश्र ने कहा कि आज हर क्षेत्र में तकनीक के विकास ने कृषि से लेकर हर चीज में नए खतरनाक तत्वों का समावेश कर दिया है। आज हमें परिष्कार और जल उपचार के क्षेत्र में नए शोध करने की आवश्यकता है। उन्होंने रसायनशास्त्र में नोबल पुरस्कार और मेटल आर्गेनिक- 2025 की चर्चा करते हुए कहा कि भारत को अभी इस क्षेत्र में नोबल पुरस्कार प्राप्त करने के लिए बहुत कार्य करने की आवश्यकता है। रसायनशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ स्मृति सिंह ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में डीन साइंस डॉ वंदना, डीन मानविकी डॉ अर्चना, डीन कॉमर्स डॉ एके चौधरी, डीन विधि संकाय डॉ पंकज चतुर्वेदी, डॉ एके डेल्टा, राजकुमार सिंह व अन्य शिक्षकों सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे।
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