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10 अगस्त, 2020|9:44|IST

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संक्रमण की चिंता से ज्यादा जरूरी था मरीज जान की बचाना

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रांची के बरियातू स्थित आलम नर्सिंग होम के डॉ. अजहर रांची के पहले डॉक्टर हैं, जो कोरोना से संक्रमित हुए थे। अजहर कहते हैं कि 13 जून को उनके यहां हजारीबाग के एक मरीज गंभीर अवस्था में आए थे। उनकी स्थिति बेहद ही नाजुक थी। उनका पल्स रेट काफी डाउन था। संक्रमण का परवाह किए बगैर उन्होंने पहले डॉक्टर का फर्ज निभाया। मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया और लगभग 24 घंटे बाद उनकी स्थिति स्थिर हो गई, लेकिन जब मरीज की कोविड रिपोर्ट आई तो वे संक्रमित थे। अब पूरे चिकित्सकों की टीम में हड़कंप मच गया। सभी को आइसोलेट कर दिया गया।जहां डॉक्टर थे, वहीं मरीज के रूप में हुए भर्ती18 जून को डॉ. अजहर की रिपोर्ट आई, वे संक्रमित हो चुके थे। अब उन्हें उसी अस्पताल में मरीज के रूप में एडमिट किया गया, जहां के वे आईसीयू प्रभारी थे। अजहर कहते हैं दस दिनों तक हॉस्पिटल में मरीज के रूप में रहे। उसके बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई तो फिर उन्हें अस्पातल से डिस्चार्च किया गया।चार दिनों तक परिवार को नहीं दी जानकारी अजहर कहते हैं तब झारखंड में कोरोना उतना उग्र नहीं हुआ था। संक्रमित व्यक्ति से लोग छुआछूत की तरह व्यवहार करते थे। सामाजिक दूरी बना लेते थे। उन्हें सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की थी। बीमारी से ज्यादा उनके ऊपर मनोवैज्ञानिक दबाव था। इन सबको ध्यान में रखते हुए वे चार दिनों तक अपने परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी। कांटैक्ट ट्रेसिंग में उनके परिवार के सदस्य भी नहीं आ रहे थे। जब वे बेहतर स्थिति में आ गए, तब उन्होंने अपने परिवार को इसकी जानकारी दी। 20 से ज्यादा लोगों की बचा चुके हैं जान पूरी तरह ठीक होने के बाद डॉ. अजहर फिर से ड्यूटी पर लौट आए हैं। अस्पताल के कोरोना आईसीयू में मरीज का इलाज कर रहे हैं। पिछले एक महीने में लगभग 15-20 कोरोना से संक्रमित मरीजों को स्वस्थ्य कर चुके हैं और लगभग एक दर्जन का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे घबराने की बजाए लक्षण आते ही लोग अपनी जांच करा लें तो वे जल्दी स्वस्थ्य हो जाते हैं। उन्होंने कहा जबतक स्थिति सही नहीं हो जाती, वे इसी तरह इलाज करते रहेंगे।

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  • Web Title:Saving patient life was more important than worrying about infection