सरला बिरला विश्वविद्यालय में सप्तशक्ति संगम संपन्न
सरला बिरला विश्वविद्यालय में सप्तशक्ति संगम का समापन समारोह हुआ। मुख्य अतिथि सुनीता हल्देकर ने कहा कि माताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। पद्मश्री चामी मुर्मू ने पर्यावरण रक्षा की जिम्मेदारी बताई। डॉ पूजा ने मातृशक्ति के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा बताया। विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं को सम्मानित किया गया।

नामकुम, संवाददाता। सरला बिरला विश्वविद्यालय में शुक्रवार को आयोजित सप्तशक्ति संगम का समापन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्र सेविका समिति की सह-कार्यवाहिका सुनीता हल्देकर ने कहा कि भारत ने विश्व को मानवता का विचार दिया है। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष पर आयोजित यह सम्मेलन एक यज्ञ के समान है। समाज में स्त्री की भूमिका की गहरी समझ माताओं, बहनों और बेटियों को होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि माताएं ही शिवाजी को छत्रपति बनाती हैं और उन्हीं की साधना से स्वामी विवेकानंद और ईश्वरचंद्र विद्यासागर बनते हैं। स्त्री राष्ट्र की आत्मा है।
समारोह की अध्यक्षता कर रही पद्मश्री चामी मुर्मू ने पर्यावरण रक्षा को मातृशक्ति की अहम जिम्मेदारी बताया और पौधरोपण पर जोर दिया। मुख्य वक्ता डॉ पूजा ने कहा कि विकसित भारत का सपना मातृशक्ति के बिना अधूरा है। उन्होंने माताओं से अपील की कि वे अपने बच्चों को सही दिशा प्रदान करें क्योंकि बच्चे ही हमारी असली पूंजी हैं। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवानेवाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। इनमें पद्मश्री जमुना टुडू, दीक्षा, अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज रंजन सिंह, पद्मश्री छुटनी महतो, अधिवक्ता रिमी रानी, आशा लिंडा, डॉ मंजू मिंज, त्रिपुला दास और मृदुल प्रमुख थीं। कार्यक्रम में रंजना ने पीपीटी के माध्यम से संघ के 100 वर्षों के कार्यों का विवरण दिया। विद्या विकास समिति के संपादक मनोज कुमार ने बताया कि आयोजन को सफल बनाने में नकुल कुमार शर्मा, अखिलेश कुमार, नीरज कुमार लाल सहित विद्या विकास समिति और विश्वविद्यालय के कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। समापन वंदे मातरम के साथ हुआ।
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