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रांची

रिम्स अपने डॉक्टरों की गुप्तचर से कराएगा निगहबानी

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 07:50 PM
रिम्स अपने डॉक्टरों की गुप्तचर से कराएगा निगहबानी

रांची। संवाददाता

गुप्तचर एजेंसी के जरिए अब रिम्स के डॉक्टरों पर नजर रखी जाएगी। प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की जानकारी जुटाकर एजेंसी रिम्स और विभाग को उपलब्ध कराएगी। जिसके बाद तथ्य के आधार पर डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा रिम्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने को लेकर भी सहमति बनी है। इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव के लिए 1250 करोड़ की अनुमानित राशि की खर्च पर मुहर लगाई गई है। इसके तहत चार भवनों का निर्माण किया जाएगा। जिनमें चाइल्ड और मेटरनिटी केयर के 250 से 300 बेड का भवन होगा। सुपरस्पेशलिटी वार्ड में बेडों की संख्या 700 करने के लिए एक नए भवन का निर्माण किया जाएगा। पांच तल्ले के भवन का निर्माण चार हजार वर्ग फूट में किया जाएगा, जिससे ओपीडी में आने वाले मरीजों को बेहतर तरीके से एक जगह इलाज मिल सकेगा। इस कार्ययोजना को स्वीकृति के लिए रिम्स के बाद अब मंत्रिपरिषद को भेजा जाएगा। वहां निर्णय होने के बाद ही फाइनल मुहर लगेगी। वहीं क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के भवन को पूरा करने के लिए दोबारा टेंडर किया जाएगा। वर्तमान में काम कर रही एजेंसी को 54.17 लाख खर्च तक के काम को पूरा कराने के बाद ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। ये निर्णय सोमवार को रिम्स की गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिये गए।

जिनके पास कोई कार्ड नहीं, रिम्स उनके इलाज पर खर्च करेगा पांच लाख

राज्य के अंतर्गत वैसे मरीज जिनके पास कोई कार्ड उपलब्ध नहीं है, वैसे निर्धन मरीजों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पांच लाख तक के खर्च का प्रावधान प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा। जिसके तहत रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक के स्तर से विभागीय अध्यक्ष के अनुमोदन पर 50 हजार रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी, वहीं निदेशक के स्तर से 50 हजार से एक लाख तक और विभागीय मंत्री के स्तर से एक लाख से पांच लाख तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

दस साल पूरा कर चुके चतुर्थ वर्गीय कर्मी होंगे समायोजित

रिम्स में कार्यरत वैसे कर्मियों जो अस्थाई तौर पर रिम्स में पिछले दस साल या उससे अधिक से कार्यरत हैं, उन्हें अब समायोजित किया जाएगा। रिम्स जीबी में लिये गए इस फैसले से करीब 75 लोग लाभान्वित होंगे। पिछले दो साल से ये कर्मी अपनी मांग को लेकर प्रयासरत थे। इसके अलावा ट्रामा सेंटर में मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है।

रोटेशन के आधार पर होंगे एचओडी

रिम्स जीबी की बैठक में रांची यूनिवर्सिटी के नियम के आधार पर सभी विभागों में एचओडी रोटेशनल आधार पर होंगे। एक एचओडी की अवधि दो साल की होगी। हालांकि रांची यूनिवर्सिटी में एचओडी का रोटेशन दो साल की अवधि का ही होता है। रिम्स प्रबंधन इस अवधि को तीन साल करने पर विचार कर रहा है।

पीपीपी मोड पर संचालित होगी रिम्स में डायलिसिस यूनिट

रिम्स में पीपीपी मोड पर डायलिसिस यूनिट का अधिष्ठापन किया जाएगा। इसको लेकर मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वीकृति दी गई। बता दें कि राज्य में रिम्स में अब 20 बेड की डायलिसिस यूनिट लगेगी, जिसमें रिम्स के भर्ती और बाहरी मरीज दोनों की डायलिसिस की जाएगी। इसके अलावा रिम्स में ई अस्पताल के शुभारंभ की स्वीकृति मिली है, अब इसके संचालन के लिए ओपन टेंडर किया जाएगा।

पैटसिटी मशीन के लिए बर्लिन अस्पताल से करार पर मुहर

बैठक के दौरान कैंसर के मरीजों के पैटसीटी के लिए बर्लिन अस्पताल से करार किया गया है। इस निर्णय के तहत रिम्स में भर्ती कैंसर के मरीज बर्लिन अस्पताल में जाकर उपचार करा पाएंगे। इसके लिए उन्हें पैसे का भुगतान रिम्स करेगा। रिम्स में पैटसीटी मशीन की खरीदारी होने पर इसका लाभ मिल सकेगा।

रिम्स में अभियंत्रण कोषांग का होगा गठन

रिम्स अब अपना अभियंत्रण कोषांग का गठन करेगा। मंत्री ने बताया कि पहले रिम्स में अपना अभियंत्रण कोषांग हुआ करता था, जो भवन निर्माण के अधीन चला गया था। इस कोषांग के गठन की स्वीकृति दी गई है। इस कोषांग में एक्जीक्यूटिव, असिस्टेंट इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर सहित अन्य कर्मियों की बहाली की जाएगी

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