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चित्रांगदा और अर्जुन के मनोभावों के साथ डूबते उतराते रहे दर्शक

चित्रांगदा और अर्जुन के मनोभावों के साथ डूबते उतराते रहे दर्शक

1 / 2गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर मेकॉन की सांस्कृतिक इकाई मजलिस की ओर से नृत्य नाटिका ‘चित्रांगदा का मंचन किया गया। चित्रांगदा गुरुदेव की कालजयी रचनाओं में से एक है, जिसमें उन्होंने नारीवाद का...

चित्रांगदा और अर्जुन के मनोभावों के साथ डूबते उतराते रहे दर्शक

2 / 2गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर मेकॉन की सांस्कृतिक इकाई मजलिस की ओर से नृत्य नाटिका ‘चित्रांगदा का मंचन किया गया। चित्रांगदा गुरुदेव की कालजयी रचनाओं में से एक है, जिसमें उन्होंने नारीवाद का...

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गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर मेकन की सांस्कृतिक इकाई मजलिस की ओर से नृत्य नाटिका ‘चित्रांगदा का मंचन किया गया। चित्रांगदा गुरुदेव की कालजयी रचनाओं में से एक है, जिसमें उन्होंने नारीवाद को मुखर किया। इस पर नृत्य नाटिका की प्रस्तुति मजलिस के कलाकारों ने किसी चुनौती से कम न थी, लेकिन उनके रवींद्रप्रेम ने यह संभव कर दिखाया। दर्शक नारीवादी मणिपुर की राजकुमारी चित्रांगदा और अर्जुन के प्रेम को महसूस किया और उनके साथ भावनाओं में बहते रहे।कार्यक्रम की शुरुआत मजलिस के सदस्यों के उद्बोधन संगीत से हुई। इसके बाद चित्रांगदा का मंचन किया गया। चित्रांगदा असाधारण थी। मणिपुर के राजा-रानी से पुत्र की कामना करते हैं, लेकिन उनके घर में पुत्री चित्रांगदा का जन्म होता है। उसका पालन-पोषण बेटों की तरह होता है। एक योद्धा के रूप में तैयार होती है। अपनी सखियों के साथ जंगल में शिकार करते हुए उसका मुकाबला अर्जुन से होता है। वह अर्जुन की आकर्षित होकर उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है। अर्जुन अस्वीकार कर देता है। आंसुओं में डूबी चित्रांगदा प्रेम के देवता मदन से पूछती है कि शस्त्र से वह अर्जुन का दिल जीत सकती है। उसे एक वर्ष के लिए शस्त्र के रूप में सौंदर्य मिलता है। चित्रांगदा का रूप देखकर अर्जुन उसपर मोहित है। चित्रांगदा और अर्जुन साथ जीना शुरू करते हैं। लेकिन, एक वर्ष की अवधि बीतते ही चित्रांगदा रूप छिनने को है। वह अपने वास्तविक रूप में अर्जुन के सामने प्रस्तुत होती है और अर्जुन उसे स्वीकार लेता है। कोरियाग्राफर जतींद्र सिंह के निर्देशन में सभी कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया। चित्रांगदा की भूमिका में अंकिता चक्रवर्ती और बिपाशा बोस खूब जमीं। अन्य कलाकरों में प्रतीक्षा मुखर्जी, माही आनंद, स्निग्धा, श्वेता किंडो, शुभांगी मिश्रा, मिताली व अन्य कलाकारों ने अच्छा साथ निभाया। संचालन कंचन दत्ता ने किया।

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  • Web Title:Ravindranath tagore's birth anniversary observed