अब दो पालियों में चलेगा डॉग कैचिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन
रांची नगर निगम अब डॉग कैचिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन दो पालियों में चलाने जा रहा है। निगम ने दो नए डॉग कैचिंग वाहनों को शामिल किया है। मेयर ने कहा कि स्ट्रीट डॉग्स की बढ़ती संख्या की शिकायतें आ रही हैं। 2017 के सर्वे में 1.25 लाख कुत्ते पाए गए थे, जिसमें 25 हजार पालतू कुत्ते हैं।

रांची, वरीय संवाददाता। नगर निगम अब दो पालियों में डॉग कैचिंग व रेस्क्यू ऑपरेशन चलाएगा। निगम ने स्ट्रीट डॉग्स के रेस्क्यू, नसबंदी व रेबीज टीकाकरण अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए दो नए डॉग कैचिंग वाहनों को अपने बेड़े में शामिल किया है। गुरुवार को मेयर रोशनी खलखो व डिप्टी मेयर नीरज कुमार ने निगम कार्यालय परिसर से इन वाहनों का शुभारंभ किया। इस तरह अब निगम के पास चार डॉग कैचिंग वाहन हो गए हैं। इस मौके पर मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि शहर में स्ट्रीट डॉग्स की बढ़ती संख्या को लेकर निगम को लगातार लोगों की शिकायत मिल रही हैं। इसी के मद्देनजर सभी वार्डों में अभियान चलाया जा रहा है।
उप महापौर की टिप्पणियाँ
उप महापौर नीरज कुमार ने कहा कि यह पहल जनहित और पशु कल्याण दोनों को ध्यान में रखकर की गई है। निगम स्ट्रीट डॉग्स के जन्म नियंत्रण और रेबीज रोकथाम के लिए लगातार टीकाकरण व नसबंदी अभियान चला रहा है। निगम का लक्ष्य सभी वार्डों में व्यापक अभियान चलाकर अधिकाधिक स्ट्रीट डॉग्स का टीकाकरण और नसबंदी करना है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक नए डॉग कैचिंग वाहन की लागत करीब 18 लाख रुपए है। मौके पर वार्ड पार्षदों के अलावा उप नगर आयुक्त रविंद्र कुमार, सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. किरण कुमारी सहित नगर निगम के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
वाहनों की विशेषता
- प्रत्येक नए डॉग कैचिंग वाहन की लागत 18 लाख रुपए है।
- वाहनों में 12-12 सुरक्षित कम्पार्टमेंट बनाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रांची नगर निगम स्ट्रीट डॉग के मामले में लगातार काम कर रहा है। इसी के मद्देनजर निगम अब दो पालियों में डॉग कैचिंग व रेस्क्यू ऑपरेशन चलाएगा। निगम ने स्ट्रीट डॉग्स के रेस्क्यू, नसबंदी व रेबीज टीकाकरण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दो नए डॉग कैचिंग वाहनों को अपने बेड़े में शामिल किया है।
शीर्ष कोर्ट ने अस्पतालों, बस अड्डों, विद्यालयों, रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को टीकाकरण या नसबंदी के बाद उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है। सार्वजनिक स्थानों से पकड़े गए लावारिस कुत्तों को अब शेल्टर होम में ही रखा जाएगा।
रांची में कुत्तों की स्थिति
रांची में 1.25 लाख में से 25 हजार पालतू कुत्ते हैं, लेकिन इनमें केवल लगभग एक हजार का ही पंजीकरण कराया गया है। निगम के वर्ष 2017 के सर्वे में शहर में 1.25 लाख कुत्तों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। वहीं वर्ष 2012 की गणना में यह संख्या 37 हजार से अधिक थी। निगम द्वारा अब तक 1.33 लाख आवारा कुत्तों का बंध्याकरण कराए जाने का दावा किया गया है। यह अभियान एनिमल बर्थ कंट्रोल एक्ट 2023 के तहत संचालित किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 2034 कुत्तों और 2132 कुतियों को एंटी रैबीज टीका लगाया गया है। पशुपालन विभाग द्वारा निगम के साथ समन्वय कर आबादी नियंत्रण और टीकाकरण की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि जानकारों का कहना है कि पालतू कुत्तों के मालिकों में पंजीकरण को लेकर उदासीनता बनी हुई है, जिससे कई बार कुत्तों के काटने की घटनाओं में परेशानी बढ़ जाती है।
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