अतिरिक्त शुल्क लेने वाले स्कूलों को राशि का करना होगा सामंजन
रांची में निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। डीसी ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे फीस वृद्धि के लिए अभिभावक-शिक्षक संघ की सहमति लें और किसी भी मद में अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल करें। इसके अलावा, स्कूलों को अपने लोगो को वेबसाइट पर जारी करने के लिए भी कहा गया है।

रांची, वरीय संवाददाता। राजधानी रांची में निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर जिला प्रशासन के सख्त होने से अभिभावक राहत महसूस कर रहे हैं। स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाए जाने, अभिभावक-शिक्षक संघ के गठन, किताबों और ड्रेस को लेकर एक दिन पहले डीसी ने निजी स्कूलों को झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 के प्रावधानों का पालन करने का निर्देश दिया। प्रशासन के सख्त होने के बाद जिन स्कूलों ने सत्र 2026-27 में किसी भी मद में अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूला है, उन्हें यह राशि आगामी महीनों की ट्यूशन फीस में सामंजन करना होगा।डीसी ने स्पष्ट किया है कि स्कूल फीस कमेटी की सहमति के बाद 10 प्रतिशत से अधिक शुल्क (कम से कम दो साल के लिए) नहीं बढ़ाया जा सकता है।
कई स्कूलों के अभिभावकों की ओर से प्रशासन को यह शिकायत मिली थी कि लगातार वर्ष में स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाई गई है। इसके बाद स्कूलों से कहा गया है कि उन्हें यह बढ़ी हुई राशि मासिक फीस में एडजस्ट करना होगा। जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज ने कहा कि नियम के विपरीत फीस वसूलना प्रावधानों के विपरीत है। स्कूलों को फीस कमेटी से सहमति लेकर ही फीस वृद्धि करनी होगी, वह भी दो साल में इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। इसलिए, स्कूलों से पिछले तीन वर्ष में कक्षावार फीस संरचना उपलब्ध कराने को कहा गया है।स्कूल की वेबसाइट पर लोगो जारी करेंस्कूल यूनिफॉर्म में बदलाव करने और तय वेंडर से इसे खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाने की शिकायत भी प्रशासन को मिली है। पता चला है कि कई स्कूल के लोगो में बदलाव करने के कारण ड्रेस में बदलाव किए जाने की तैयारी थी। इसपर डीसी ने कहा है कि स्कूल अपना लोगो अपनी वेबसाइट पर जारी करें, अभिभावक अपनी मर्जी से उसे ड्रेस में उपयोग कराएंगे।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


