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दोपहर में सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारी, मेन रोड में कुछ देर आवाजाही ठप

दोपहर में सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारी, मेन रोड में कुछ देर आवाजाही ठप

संक्षेप:

रांची में खूंटी के पहड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों ने बंद का आयोजन किया। प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारी और न्याय की मांग की। अलबर्ट एक्का चौक पर हुए प्रदर्शन में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी हुई। सोमा मुंडा आदिवासी समाज के सम्मानित नेता थे और उनकी हत्या पर विरोध दर्ज किया गया।

Jan 18, 2026 01:52 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची, प्रमुख संवाददाता। खूंटी के पहड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में बुधवार को आहूत बंद का रांची में मिलाजुला असर दिखा। आदिवासी संगठनों के आह्वान पर दोपहर 12 बजे से समर्थकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि बंद में जनजीवन पूरी तरह से ठप नहीं रहा। अधिकांश इलाकों में वाहन सामान्य रूप से चले। बड़ी संख्या में एकत्र होकर जुलूस के रूप में लोग शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए अलबर्ट एक्का चौक पहुंचे। जुलूस में लोगों ने बैनर लेकर हत्यारोपियों की गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग करते रहे।

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जुलूस के बाद कुछ समय के लिए मेन रोड में आवागमन बाधित रहा। इससे राहगीरों को काफी परेशानी हुई। अलबर्ट एक्का चौक पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि पहड़ा राजा सोमा मुंडा आदिवासी समाज के सम्मानित नेता थे और उनकी हत्या ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद से प्रशासन की कार्रवाई धीमी है। जुलूस के पहुंचते ही रूट किया डायवर्ट प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। अलबर्ट एक्का चौक सहित आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती रही, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की, जिसका पालन करते हुए कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। दोपहर में आदिवासी संगठनों का जुलूस जब अलबर्ट एक्का चौक पहुंचा तो मौजूद ट्रैफिक पुलिस ने सर्जना चौक के पास से रूट डायवर्ट कर दिया। डेली मार्केट की ओर से आने वाले सभी वाहनों को सर्जना चौक से पुरुलिया रोड की ओर भेजा गया। वहीं शहीद चौक से आ रहे वाहनों को अलबर्ट एक्का चौक से लालपुर की ओर भेज दिया गया था। प्रदर्शन खत्म होने के बाद मेन रोड की यातायात व्यवस्थ सामान्य हो गयी। करमटोली चौक के पास टायर जलाकर प्रदर्शन करमटोली धूमकुड़िया में आदिवासी संगठन के लोग शनिवार को जमा हुए। वहां पर आदिवासी संगठन के कार्यकर्ताओं ने करमटोली चौक के पास टायर जला कर प्रदर्शन किया। साथ ही उस मार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया। करीब एक घंटे तक संगठन के लोगों ने न सिर्फ प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की बल्कि दोषियों पर अविलंब कार्यवाही की मांग भी की। इसके बाद बंद समर्थकों ने कचहरी होते हुए मेन रोड अलबर्ट एक्का चौक तक गए और वहां पर भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में प्रेम शाही मुंडा, लक्ष्मीनारायण मुंडा, देवकुमार धान, बलकु उरांव, अभय भुटकुंवर, प्रीतम लोहरा, डब्ल्यू मुंडा, रमेश उरांव, रवि पीटर, सतीश उरांव, सुखराम पाहन, अमित मुंडा, सुबोध दांगी, पारसनाथ साहू, सुखराम पाहन, जेठु मुंडा, जितेन्द्र महतो, बिनसाय मुंडा, कैलाश बेदिया काशीनाथ पाहन, मो एजाज आलम, कृष्णा उरांव, अगनु उरांव, विदेशी मुंडा, सुनील मुंडा, संजय मुंडा, मनोज नागवंशी, शिवशंकर नीलकंठ आदि शामिल थे। बाइक जुलूस निकालकर कराया बंद आदिवासी बचाओ युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं द्वारा मोटरसाइकिल जुलूस निकालकर बंद कराया गया। जिसका नेतृत्व आकाश तिर्की और राहुल तिर्की ने किया। इसी तरह रांची शहर के विभिन्न जगहों, रांची ग्रामीण क्षेत्रों में भी बंद कराया गया। इसी तरह पूरे झारखंड में भी विभिन्न जिलों में भी बंद कराया गया। 56 गांव के पारंपरिक संगा पड़हा राजा थे सोमा ‎आदिवासी नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा ने बताया कि सोमा मुंडा 56 गांव के पारंपरिक संगा पड़हा राजा थे। जिन्होंने जमीन, जंगल, जल की रक्षा के लिए जीवन समर्पित किया। ऐसी हत्याओं का सिलसिला झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से लगातार होते आ रहा है। सरकार किसी की भी इस पर अंकुश नही लगाया जा रहा है। आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं की ये हत्यायें आदिवासी अधिकारों, परंपराओं और लोकतंत्र पर हमला है। लक्ष्मी नारायण मुंडा ने बताया कि सात जनवरी को खूंटी जिले में सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हत्या व्यक्तिगत नही, बल्कि जमीन-जंगल-जल के रक्षक के रुप में उनकी संघर्षपूर्ण आवाज को दबाने की सुनियोजित साजिश थी। 3.16 एकड़ विवादित भूमि पर पारंपरिक पड़्हा जतरा मेला आयोजित होने के कारण स्थानीय आदिवासियों ने भूमि बिक्री का विरोध किया था। नवंबर में भूमि समतल करने एवं सीमा चिन्ह हटाने के बाद साजिश रची गई, जिसके परिणामस्वरूप सोमा मुंडा की हत्या हुई। मुख्य साजिशकर्ता, शूटर एवं भूमि माफिया फरार हैं और इस हत्याकांड का पूर्ण खुलासा नही हुआ है, जो आदिवासी समाज के लिए गंभीर चुनौती है। आदिवासी संगठनों ने सरकार से की मांग सोमा मुंडा हत्याकांड के सभी दोषियों, साजिशकर्ताओं को अविलंब गिरफ्तार कर सजा दिलायी जाए ‎पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा और सुरक्षा प्रदान की जाए ‎भूमि माफिया पर विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित हो, सीएनटी-एसपीटी एक्ट का सख्त पालन हो ‎पेसा कानून को मजबूत बनाया जाए, ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार दिए जाएं आदिवासी कार्यकर्ताओं और नेताओं को पुलिस सुरक्षा दी जाए ‎राज्य में भूमि घोटालों की जांच के लिए उच्च स्तरीय आयोग गठित हो ‎सभी पुराने भूमि विवाद मामलों में तेजी से कार्रवाई हो