
टीआरएल संकाय जनजातीय भाषाओं के संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल: डॉ. बन्ने
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के प्रो. (डॉ.) विशाल बन्ने ने रांची विश्वविद्यालय के टीआरएल संकाय का दौरा किया। उन्होंने जनजातीय भाषाओं के संरक्षण के लिए इसे 'राष्ट्रीय मॉडल' बताया और अपने विश्वविद्यालय में भी इन भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने की पहल की। शिक्षकों ने पाठ्यक्रम और शोध कार्यों की जानकारी साझा की।
रांची, विशेष संवाददाता। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर (मध्य प्रदेश) के प्रो. (डॉ.) विशाल बन्ने ने सोमवार को रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (टीआरएल) संकाय का दौरा किया। डीन (मानविकी) प्रो. अर्चना कुमारी दुबे के नेतृत्व में एक शैक्षणिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। डॉ. बन्ने ने संकाय की नौ जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं शोध गतिविधियों का गहन अवलोकन किया। संवाद के दौरान डॉ. बन्ने ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय का टीआरएल संकाय जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और अकादमिक समावेशन के लिए एक ‘राष्ट्रीय मॉडल’ है। उन्होंने घोषणा की कि वे अपने विश्वविद्यालय में भी इन भाषाओं की पढ़ाई प्रारंभ करने की पहल करेंगे।
वर्तमान में डॉ. बन्ने मोरहाबादी स्थित फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित एआईयू पूर्वी क्षेत्र फुटबॉल टूर्नामेंट में पर्यवेक्षक के रूप में झारखंड आए हुए हैं। इसी क्रम में उन्होंने आदिवासी-मूलवासी सहअस्तित्व, लोक संस्कृति और भाषाई विविधता की शैक्षणिक संरचना को करीब से समझा। मौके पर डॉ. कुमारी शशि, डॉ. दमयंती सिंकू, डॉ. बीरेंद्र कुमार सोय, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. बीरेंद्र कुमार महतो, डॉ. रीझु नायक, डॉ. तारकेश्वर सिंह मुंडा और डॉ. किशोर सुरिन सहित अन्य शिक्षकों ने पाठ्यक्रम, शोध कार्यों और झारखंडी लोक जीवन से जुड़े शैक्षणिक प्रयोगों की विस्तृत जानकारी साझा की।

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